नवभारत संपादकीय: ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू, ईरान पर अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों का कितना पड़ेगा भारत पर असर?

US Iran Conflict: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट शुरू कर सख्त आर्थिक नाकाबंदी की है। इसका असर ईरानी रियाल पर पड़ा है, वहीं भारत के चाबहार पोर्ट और व्यापार पर भी प्रभाव संभावित है।
US President Donald Trump speaking at a podium.
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Impact Of US Sanctions On India Iran Trade: अमेरिका ने समझ लिया कि ईरान के खिलाफ सशस्त्र अ हमला करना व्यर्थ है, क्योंकि वह होर्मुज की खाड़ी ब्लॉक कर देता है और अमेरिकी ड्रोन व मिसाइल के खिलाफ अपने हथियार इस्तेमाल करता है। इसे देखते हुए अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध आर्थिक युद्ध छेड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू करने की घोषणा की।

ईरानी अर्थव्यवस्था पर गिरती गाज

ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था को इस तरह से निशाना बनाए जाने का सटीक असर हुआ और डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा रियाल बुरी तरह गिर गई। इससे ईरान की जनता के लिए भारी मुसीबत खड़ी हो जाएगी। पिछले 6 महीनों में बमबारी, मिसाइल हमले और नौसैनिक नाकाबंदी करने से जो अमेरिका को हासिल नहीं हो पाया, वह अब ईरान पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगाने से संभव होता दिख रहा है।

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वैश्विक व्यापार और डॉलर का दबदबा

अब ईरान के हर वित्तीय लेन-देन पर अमेरिका की नजर रहेगी। वह हर ऐसे देश पर कार्रवाई करेगा, जो ईरान से व्यापार करेगा। ट्रंप ईरान को आर्थिक रूप से बर्बाद होते देखना चाहते हैं। अमेरिका ने ऐसा ही आर्थिक नाकेबंदी का कदम क्यूबा और रूस के खिलाफ भी उठाया था। डॉलर विश्व की सबसे मूल्यवान और शक्तिशाली मुद्रा है। इसके बाद यूरो का नंबर आता है। दुनिया के सभी देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर जैसी हार्ड करंसी प्रमुखता से रखते हैं। लगभग 90 प्रतिशत वैश्विक सौदे डॉलर में ही होते हैं।

ब्रिक्स की सीमाएं और अमेरिकी वित्तीय ताकत

डॉलर अमेरिका की बहुत बड़ी ताकत है। बहुत यद्यपि अमेरिका ने 1971 में डॉलर के समर्थन में सोना रखने की गारंटी (गोल्ड स्टैंडर्ड) को खत्म कर दिया फिर भी डॉलर का दबदबा कम नहीं हुआ। अमेरिका ने जब रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तो रूसी बैंकों को करारा झटका लगा था। अमेरिका का राजनीतिक व वित्तीय स्थायित्व काफी मजबूत है। डॉलर का विकल्प खोजने या नई करंसी निर्मित करने में ब्रिक्स देशों को अब तक कोई सफलता नहीं मिली। ईरान के खिलाफ शुरू किए गए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का असर भारत पर भी पड़ने की संभावना है।

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भारत पर प्रभाव और चाबहार पोर्ट की अहमियत

ईरान की सैन्य गतिविधियों से संबंध रखने के आरोप में 4 भारतीय कंपनियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है। भारत ने ईरान को चाबहार बंदरगाह बनाने में मदद दी। इस बंदरगाह के जरिए भारत, अफगानिस्तान से प्रवेश कर पाकिस्तान को घेर सकता है। भारत से ईरान को चावल, चाय व दवाइयों का निर्यात किया जाता है। अमेरिका इसे रोकना चाहेगा। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का संचालन कर रहे हैं।

अमेरिकी निशाना और चीन की भूमिका

ईरान की तेल व पेट्रोकेमिकल निर्यात से होने वाली कमाई, शिपिंग, बैंकिंग, प्रौद्योगिकी व डिजिटल संसाधन अमेरिका के निशाने पर हैं। केवल चीन ही ऐसा देश है जिसकी वित्तीय संस्थाओं पर अमेरिका रोक या प्रतिबंध नहीं लगा पाता। अमेरिका चीन से सीधा टकराव टालता है। ईरान का बड़ा व्यापारिक भागीदार चीन है, इसलिए ईरान को अकेला या अलग-थलग करना अमेरिका के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा।

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