निशानेबाज: हमसे खाया ना गया, तुमसे खिलाया ना गया, मेहमाननवाजी का फर्ज निभाया ना गया
बहुत दूर से घर आए अतिथि को भोजन कराना सामान्य शिष्टाचार है लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने लंच परोसने की पूरी तैयारी रहने के बावजूद यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को भूखा वापस भेजा।
- Written By: दीपिका पाल
आज का निशानेबाज (सौ.डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, अन्न को पूर्ण ब्रम्ह माना गया है. शरीर और दिमाग तभी चलता है जब व्यक्ति भूखा न रहे. कई दिनों से निराहार तपस्या कर रहे कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ को जब सुजाता ने खीर अर्पित की तो उसका सेवन कर उन्हें दिव्य ज्ञान की अनुभूति हुई और वे गौतम बुद्ध बने. हमारी संस्कृति में अन्नदान को सबसे बड़ा दान माना गया है।’
हमने कहा, ‘मोदी सरकार के समान पुण्यवान कौन होगा जो देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त में अनाज उपलब्ध कराती है. गृहस्थाश्रम को इसलिए श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि ब्रम्हचारियों से लेकर संन्यासियों तक को गृहस्थ ही भोजन प्रदान करते थे. भोजन करानेवाले के मन में प्रेम और विनम्रता का भाव रहना चाहिए. श्रीकृष्ण जब पांडवों के दूत बनकर कौरवों की सभा में गए थे तो दुर्योधन ने कहा कि वह पांडवों को सुई की नोंक के बराबर भी जमीन नहीं देगा. यह वार्ता टूट गई. दुर्योधन ने श्रीकृष्ण से कहा कि भोजन करके जाइए।
श्रीकृष्ण ने साफ मना कर दिया. उन्होंने कहा कि किसी के यहां भोजन केवल 2 स्थितियों में किया जाता है. या तो व्यक्ति बहुत भूखा हो या फिर उसे प्रेम से खिलाया जाए. न तो मुझे भूख लगी है और न तुम्हारे मन में प्रेम है. इसके बाद श्रीकृष्ण ने दुर्योधन का मेवा-मिष्ठान्न त्याग कर अपने भक्त महात्मा विदुर के घर जाकर सादा भोजन किया.’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, महाराणा प्रताप को अकबर की अधीनता स्वीकार करने के लिए राजी करने अकबर के सेनापति मानसिंह पहुंचे थे. महाराणा प्रताप ने मुगलों की दासता स्वीकार करनेवाले राजपूत मानसिंह के साथ खाना टाल दिया और अपने बेटे अमरसिंह को मानसिंह के साथ बैठने को कहा. मानसिंह ने इसे अपमान माना और खाने की थाल छोड़कर लौट गया।
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इसके बाद 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध होकर रहा.’ हमने कहा, ‘स्थितियां आज भी वैसी ही हैं. तमाम डिप्लोमेटिक वार्ताओं के साथ सम्मान में दिया गया लंच या डिनर जुड़ा रहता है. दो देशों के नेता शैम्पेन या वोदका का जाम टकराकर चीयर्स कहते हैं और फिर एक साथ भोजन करते हैं.’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, बहुत दूर से घर आए अतिथि को भोजन कराना सामान्य शिष्टाचार है लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने लंच परोसने की पूरी तैयारी रहने के बावजूद यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को भूखा वापस भेजा. ट्रंप ने सख्त शब्दों में चीखते हुए अतिथि और उनके प्रतिनिधि मंडल से कहा- गेट ऑफ माय लॉन! इस तरह जेलेंस्की को अपमानित कर खदेड़ा गया. अब समझ जाइए कि मगरूर ट्रंप का मिजाज कैसा है।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
