नवभारत विशेष: UPI पर नई फीस से ग्राहक की जेब पर क्या पड़ेगा असर? जानें पूरा नियम

UPI Payment Charges: ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट भुगतान पर 0.4% MDR की नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी। जानें स्कूल फीस, बीमा और अन्य भुगतानों पर इसका क्या असर होगा।
UPI MDR Above 2000
यूपीआई चार्जफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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UPI MDR Above 2000: मेरा बेटा एक पब्लिक स्कूल में 11वीं कक्षा का छात्र है। उसकी 3 माह की फीस 27,210 रुपये है। अब मुझे अक्टूबर में उसकी फीस की तीसरी किस्त भरनी है। अगर यह फीस में यूपीआई द्वारा अदा करता हूं तो उस पर ज्यादा रकम देनी पड़ेगी। यह अतिरिक्त फीस कौन अदा करेगा? इसका बोझ मुझ पर ही पड़ेगा।

अनुमान यह है कि यही स्थिति बीमा प्रीमियम की भी रहेगी। कहने का अर्थ यह है कि 2,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई पेमेंट्स पर जो यह 0.4 प्रतिशत की फीस लगाई गई है, उसका बोझ आखिरकार ग्राहक या उपभोक्ता को ही उठाना पड़ेगा। नाक चाहे इधर से पकड़ लो या उधर से पकड़ लो।

यूपीआई पेमेंट्स पहले फ्री थे और अब इन पर फीस लगा दी गई है। इससे महंगाई निश्चित रूप से बढ़ेगी, आम आदमी यूपीआई से पेमेंट करना बंद/कम कर देगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने 15 सितंबर 2026 को 2,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने की घोषणा की। फ्लैट 5 रुपये का चार्ज पेट्रोल व डीजल की खरीद, बीमा प्रीमियम, रेल टिकट, स्कूल और अन्य अनेक सरकारी सेवाओं पर लगाया जाएगा।

15 अक्टूबर से UPI पर MDR

आगामी 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने के बावजूद एमडीआर व्यक्ति-से-व्यक्ति को किए गए पेमेंट पर नहीं लगेगा यानी रिश्तेदारों व दोस्तों को किए गए यूपीआई ट्रांसफर पर कोई फीस नहीं लगेगी और ऑटो डेबिट पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा। इसी तरह छोटे व्यापारियों, चाय की दुकानों, किराना स्टोर या मिल्क बूथों के लिए भी एमडीआर की छूट होगी।

अगर आपने अपने दोस्त को 2,00,000 रुपये बतौर यूपीआई ट्रांसफर किए हैं तो उस पर किसी प्रकार का कोई एमडीआर नहीं होगा, लेकिन अगर आपकी चाय की दुकान है और आपको 1,10,000 रुपये यूपीआई ट्रांसफर से आए तो आपको इस पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर देना होगा।

जाहिर है एक दुकानदार के रूप में यह अतिरिक्त पैसा आप अदा करना पसंद नहीं करेंगे। इस स्थिति में आप यूपीआई ट्रांसफर को प्राथमिकता देना बंद/कम कर देंगे और ग्राहकों से कैश लेना चाहेंगे।

दूसरा यह कि इस अतिरिक्त भार को अपने ग्राहकों पर डालने का प्रयास करेंगे यानी एक कप चाय जो 20 रुपये की बेचते हैं उसे 21-22 रुपये में देने लगेंगे। म्यूच्यूअल फं या स्टॉकब्रोकर्स को पेमेंट्स पर एमडीआर 0.02 प्रतिशत निर्धारित किया गया है, 300 रुपये के कुल कैप के साथ।

UPI MDR का बोझ आखिर किस पर पड़ेगा

वित्त मंत्रालय ने कहा है, 'बैंकों को यह सलाह दी गई है कि वह यह सुनिश्चित करें कि व्यापारी एमडीआर चार्ज ग्राहकों पर न थोपें। यूपीआई एप्लीकेशन प्रोवाइडर्स को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है कि वह प्लेटफार्म फीस या छुपे हुए चार्ज ग्राहकों पर न थोपें।'

इस वक्तव्य का अर्थ यह है कि चार्ज व्यापारियों को बर्दाश्त करना पड़ेगा। लेकिन क्या ऐसा संभव है? ई-कॉम प्लेटफार्म को 0.4 प्रतिशत फीस देनी होगी, 300 रुपये के कैप के साथ। चाहे आप स्मार्टफोन खरीदें या सोफा सेट प्लेटफार्म को 300 रुपये देने होंगे।

कौन-सा ऑनलाइन प्लेटफार्म (या बड़े फुटकर व्यापारी या रेस्टोरेंट) हर बड़ी बिक्री पर 300 रुपये देना पसंद करेगा। व्यापारी इस फीस को अपने ग्राहकों की तरफ धकेल देंगे अपनी चीजों का दाम बढ़ाकर दुकानदार यूपीआई से पैसा लेना पसंद नहीं करेंगे। ई-कॉम प्लेटफॉर्म्स हाई-वैल्यू सौदे में डिस्काउंट देना बंद कर देंगे या कीमत बढ़ा देंगे।

छुरी खरबूजे पर गिरे या खरबूजा छुरी पर गिरे, हर हाल में कटेगा खरबूजा ही। एनपीसीआई का कहना है कि 95 प्रतिशत से अधिक व्यापारियों का लेन-देन, जो 2,000 रुपये से कम है, पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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जले पर नमक छिड़क रही सरकार

सरकार द्वारा एमडीआर वसूल करना सिर्फ एक टैक्स कलेक्शन है। अगर सरकार को इससे नुकसान हो रहा है तो एटीएम को पूरी तरह से बंद करके सिर्फ यूपीआई पेमेंट पर फोकस करना चाहिए। सरकार और बैंकों को इतने लाभके बाद आखिर क्यों एमडीआर लगाया जा रहा है? सरकार आखिर कौन-सी सब्सिडी दे रही है, जो वह यूपीआई से वसूलना चाहती है?

लेख-नरेंद्र शर्मा के द्वारा

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