Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

घोषणा पत्रों पर भरोसा करें या नहीं

  • Written By: चंद्रमोहन द्विवेदी
Updated On: Apr 18, 2024 | 10:39 AM
Follow Us
Close
Follow Us:

हर पार्टी अपना चुनावी घोषणा पत्र (Election Manifesto) जारी करती है ताकि मतदाता उसे पढ़ें और उसमें किए गए वादों पर विश्वास कर उसे वोट दें। जो निष्ठावान या कमिटेड वोटर रहता है उसे घोषणा पत्र पढ़ने की जरूरत ही नहीं रहती। वह हमेशा अपनी पसंद की पार्टी को वोट देता है। इसमें कोई तर्क-वितर्क नहीं करता। पार्टी भी अपने परंपरागत वोटरों को पहचानती है। घोषणा पत्र उन मतदाताओं के लिए रहता है जिनकी च्वाइस तय नहीं होती और मन चल-विचल रहता है। ऐसे वोटर को गारंटी देकर पटाया जाता है। ऐसे मतदाता देखते ही किसकी गारंटी फायदेवाली या आकर्षक है।

हर लुभावना वादा पूरा नहीं होता लेकिन फिर भी उम्मीद तो जगाता है। इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ के नारे पर चुनाव जीता था लेकिन जनता वैसी ही गरीब रही, नेता अमीर होते चले गए! बीजेपी ने 2014 के चुनाव में किसानों को उत्पादन लागत के आधार पर फसल का गारंटी भाव देने का वादा किया था जो पूरा नहीं हुआ। घोषणा पत्र में वादों की भरमार रहती है। सत्ता पक्ष अपने वादों को जनकल्याणकारी संकल्प पत्र और विपक्षी पार्टियों के वादों को ‘रेवडी’ बताता है। शिवसेना ने अपने घोषणा पत्र को ‘वचननामा’ नाम दिया है।

लोकतंत्र में उम्मीद की जाती है मतदाताओं को विभिन्न पार्टियों के घोषणा पत्र पढ़ना चाहिए लेकिन पढ़े-लिखे लोग भी या तो इन्हें पढ़ते नहीं या सरसरी नजर डालकर छोड़ देते है। सुप्रीम कोर्ट ने भी मुफ्त में बहुत कुछ देनेवाले आश्वासनों पर सवाल उठाया था।

सम्बंधित ख़बरें

बंगाल चुनाव 2026: अमित शाह ने जारी किया BJP का घोषणा पत्र; रोजगार, महिला सुरक्षा और 7वें वेतन आयोग पर बड़ा दांव

Year Ender 2024: एक साल दो चुनाव और अप्रत्याशित नतीजे, महाराष्ट्र की राजनीति की इन घटनाओं ने सबको…

लोकसभा चुनाव 2024 नतीजे के सदमें से नहीं उबर पाए राहुल गांधी, अब अमेरिका में दे रहें अनाब-सनाब बयान

पीएम मोदी के शपथ ग्रहण पर दीपेन्द्र हुड्डा का बड़ा बयान, कहा- समारोह में हुआ सेना का अपमान

अब तो वादे या आश्वासन सिर्फ 5 वर्ष तक के लिए सीमित नहीं रहते। जनता को आज से 23 वर्ष बाद अर्थात 2047 तक के लिए वादे किए जाने लगे हैं क्योंकि वह देश की आजादी को शताब्दी वर्ष होता। फाइबर ग्लास की शीट से झोपड़ा बस्तियां ढक देनेवाले देश को कुछ ही वर्षों में तीसरे नंबर की वर्ल्ड इकोनॉमी बनाने का वादा करते हैं। साथ ही करोड़ों गरीबों को 5 वर्ष तक मुफ्त राशन देने का भी समानांतर वादा किया जाता है। किसी को इसमें विरोधाभास नहीं देखना चाहिए।

Trust election manifestos or not

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Apr 18, 2024 | 10:39 AM

Topics:  

  • Election Manifesto
  • Lok Sabha Elections 2024

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.