Navbharat Nishanebaaz: विपक्षी दलों में फूट का नजारा, बागियों को बीजेपी का सहारा

Political Party Split: निशानेबाज के अंदाज में पेपर लीक से लेकर पार्टियों की टूट-फूट तक पर व्यंग्य। शीशे, दिल, खेल के रिकॉर्ड और हड्डियों के बहाने राजनीति पर चुटीली टिप्पणी।
Political Party Breaking Satire
निशानेबाजफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Political Party Breaking Satire: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हम लगातार आ रही टूट-फूट की खबरों से परेशान हैं। कभी परीक्षाओं के पेपर फूटते है तो कभी कोई अच्छी-भली पार्टी फूट जाती है। विधायक व सांसद फूटकर अलग गुट बनाते या सत्तारुढ़ पार्टी में शामिल हो जाते हैं। विपक्षी नेताओं की किस्मत फूटती चली जा रही है और बीजेपी की तकदीर का सितारा बुलंद होता जा रहा है।'

हमने कहा, 'टूट-फूट से घबराने की आवश्यकता नहीं है। घरों में शीशे की बोतलें, कप-सॉसर, क्रॉकरी, डिनर सेट हाथ से फिसलते ही टूट जाते हैं। आपने गीत सुना होगा- शीशा हो या दिल हो, आखिर टूट जाता है! खेल में पुराने रिकार्ड टूट जाते हैं। आर्थोपीडिक डॉक्टर रास्ता देखते रहते हैं कि गड्ढे वाली सड़क में किसी के हाथ-पैर की हड्डी टूटे और वह उनके पास इलाज के लिए आए।'

Political Party Breaking Satire
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पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, यदि चीजें टूटेंगी नहीं तो नई वस्तुओं का सृजन कैसे होगा? विध्वंस और निर्माण प्रकृति की लीला है। 4 युग बीतने के बाद प्रलय होता है और फिर से ब्रम्हा को नई सृष्टि का निर्माण करना पड़ता है। टूट-फूट या तोड़-फोड़ होती रहनी चाहिए। भगवान राम ने भी तो राजा जनक की सभा में शिव का पुराना धनुष तोड़ा था। रही बात एक पार्टी छोड़ कर दूसरी ज्वाइन करने की, तो ऐसा पहले भी होता रहा है। आम्भी ने पोरस से गद्दारी कर सिकंदर का साथ दिया था। जयचंद ने पृथ्वीराज चौहान को दगा देकर मोहम्मद गोरी से हाथ मिला लिया था। मीर जाफर ने नवाब सिराजुद्दौला से दगाबाजी कर ईस्ट इंडिया कंपनी का साथ दिया था। कुछ लोग खुद्दार होते हैं तो कुछ गद्दार ! इनके बगैर इतिहास नहीं बनता।'

हमने कहा, 'मौकापरस्त या अवसरवादी नेता धन के लोभ या पद के मोह में पड़कर अपनी पार्टी से विश्वासघात करते है। देश में विपक्ष लगातार टूट रहा है। ममता, केजरीवाल और उद्धव ठाकरे की पार्टियों में पतझड़ आ गया। बगावत करनेवाले बीजेपी की गोद में बैठ रहे हैं। विपक्षी नेताओं का दिल कह रहा है- वफा जिनसे की, बेवफा हो गए, वो वादे मोहब्बत के क्या हो गए !'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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