

TMC Parliamentary Rebellion Crisis: विधानसभा चुनाव में पराजय के आघात से ममता बनर्जी वि उबरी नहीं थीं कि उनकी पार्टी टीएमसी के 20 सांसदों ने उन्हें जबरदस्त झटका देते हुए एनडीए को समर्थन दे दिया। विधानसभा के बाद अब संसद तक ममता के खिलाफ बगावत हो गई। कहावत है- डूबते जहाज को चूहे भी छोड़ देते हैं। यही बात टीएमसी में नजर आ रही है। जो सांसद अब तक ममता के प्रति वफादार थे, उन्होंने अचानक पाला बदल लिया।
लोकसभा में टीएमसी के 28 सदस्य हैं। बागी सांसदों की दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के निवास पर बैठक हुई। इस बागी खेमे का दावा है कि पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसद उनके साथ हैं। ये सांसद न टीएमसी छोड़ना चाहते हैं न बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं।
ये सदस्य एक अलग संसदीय समूह के रूप में बीजेपी के नेतृत्व के एनडीए का समर्थन करेंगे। इसके पहले बंगाल विधानसभा में टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 ने विधायक रितव्रत बनर्जी का समर्थन किया, जिन्हें नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता मिल गई है। जिस समय ममता बनर्जी विपक्षी पार्टियों के इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने दिल्ली में थीं, तभी उनके 20 सांसदों ने उन्हें दगा दे दिया। कहा जा रहा है कि दलबदल संबंधी कानून में अलग समूह या गुट के लिए कोई प्रावधान नहीं है इसलिए इन सांसदों को किसी दल में विलय करना होगा।
ममता बनर्जी के प्रति वफादार, तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में जीतने वाले सदस्यों को एनडीए में शामिल होने का जनादेश नहीं मिला था। जो टीएमसी सांसद बीजेपी के साथ जाना चाहते हैं, उन्हें इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ना चाहिए। फिलहाल टीएमसी के 20 सांसदों की बगावत की वजह से लोकसभा में विपक्ष के केवल 214 सांसद रह जाएंगे जबकि एनडीए के सांसदों की तादाद बढ़कर 313 हो जाएगी। दलबदल विरोधी कानून में प्रावधान है कि यदि दो तिहाई सांसद या विधायक पार्टी से अलग हो जाते हैं तो उन्हें मूल पार्टी मान लिया जाता है। इस गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिखकर लोकसभा के भीतर असली टीएमसी के रूप में मान्यता देने की मांग की है।
महाराष्ट्र में जिस तरह एकनाथ शिंदे के गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी गई थी, वैसा ही निर्णय टीएमसी के बागी सांसदों का गुट अपने लिए चाहता है। इस गुट में कोकोली घोष दस्तीदार का भी समावेश है जिन्हें ममता बनर्जी ने 20 मई को लोकसभा में चीफ व्हिप के पद से हटाते हुए वह पद कल्याण बनर्जी को दे दिया था।
राज्यसभा में भी टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रे ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर ममता को झटका दिया। राज्यसभा की सदस्यता से सुखेंदु का इस्तीफा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने स्वीकार कर लिया। टीएमसी सांसद व पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने दावा किया कि बागी सांसदों के पास दो-तिहाई समर्थन नहीं है। भूपेंद्र यादव के यहां हुई बैठक में लोकसभा के 13 और राज्यसभा का 1 सांसद मौजूद था। बीजेपी 20 सांसदों का मनगढ़ंत आंकड़ा बता रही है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा