Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • रवि, 2 अगस्त 2026
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • ई-पेपर
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

संपादकीय: राज्यपालों की मनमानी पर आखिर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया अंकुश, क्या थमेगा अब विपक्ष शासित राज्यों में गतिरोध

सुप्रीम कोर्ट के पास दुर्लभ से दुर्लभ परिस्थिति में संविधान के अनुच्छेद 142 के उपयोग का अधिकार है। इसका इस्तेमाल करते हुए न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्या. आर. महादेवन ने यह निर्णय दिया।

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Apr 15, 2025 | 11:59 AM

राज्यपालों की मनमानी पर आखिर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया अंकुश (सौ. डिजाइन फोटो )

Follow Us
Follow Us:

नवभारत डिजिटल डेस्क: विपक्ष शासित राज्यों में विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को ठंडे बस्ते में डालने के लिए राज्यपालों ने संविधान के अनुच्छेद 200 के अस्पष्ट प्रावधान का भरपूर इस्तेमाल किया। उस प्रावधान में लिखा है कि राज्यपाल विधेयक को उचित समयावधि में मंजूरी दें परंतु समयसीमा निश्चित नहीं की गई है। इसका फायदा उठाते हुए विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने तक विधेयकों को अटकाए रखने का काम राज्यपालों ने किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस अस्पष्टता को दूर करते हुए 1 माह के भीतर मंजूरी देना अनिवार्य कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के पास दुर्लभ से दुर्लभ परिस्थिति में संविधान के अनुच्छेद 142 के उपयोग का अधिकार है। इसका इस्तेमाल करते हुए न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्या. आर. महादेवन ने यह निर्णय दिया. राज्यपाल द्वारा दुरुस्ती पर पुनर्विचार के लिए वापस भेजे गए विधेयक को विधानमंडल द्वारा पुन: पारित किए जाने पर, बार-बार विधेयक वापस भेजने की प्रक्रिया रोककर उस पर अंतिम निर्णय लेना होगा।

विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक यदि राज्यपाल ने राष्ट्रपति के पास भेजा है तो संविधान के अनुच्छेद 201 के अनुसार राष्ट्रपति को विधेयक प्राप्त होने के 3 महीने के भीतर मंजूरी देनी होगी या फिर विधेयक को नामंजूर करते हुए इस संबंध में उचित कारण बताने होंगे। अनुच्छेद 201 के अनुसार राष्ट्रपति के ऐसे निर्णय की सुप्रीम कोर्ट जांच कर सकता है. यदि केंद्र सरकार को एसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से राष्ट्रपति के अधिकारों में हस्तक्षेप हुआ है तो वह सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकती है या इस मामले की 5, 7 या 9 न्यायाधीशों की व्यापक संविधान पीठ के सम्मुख सुनवाई की मांग कर सकती है।

सम्बंधित ख़बरें

TMC के फ्रीज बैंक खातों से हटेगा ताला? डोला सेन की याचिका पर सोमवार को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

मानसून सत्र या महज औपचारिकता? अखिलेश यादव ने खोल दी BJP की रणनीति की पोल, कहा- गिने-चुने दिन की सरकार…

महाराष्ट्र सरकार कराएगी स्लम एक्ट का मेगा परफॉर्मेंस ऑडिट, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देश पर कमेटी गठित

पत्नी का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर साबित हुआ तो नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

नवभारत विशेष से जुड़े सभी रोचक आर्टिकल्स पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

सोचा जा सकता है कि कार्यपालिका को ऐसा स्पष्ट व कठोर निर्देश देने की नौबत आखिर क्यों आई. गत 10 वर्षों से विपक्ष शासित राज्यों में विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को राज्यपाल सहमति न देते हुए अटका रहे थे. यदि विधानमंडल दोबारा प्रस्ताव पारित कर भेजे और राज्यपाल के पास विकल्प न हो तो वह उसे राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भेजने के नाम पर उसकी मंजूरी में अड़ंगा डालता था। केंद्र सरकार को इस मामले में आत्मपरीक्षण करने की आवश्यकता है। लोकतंत्र सुगमता से चले, इसके लिए परस्पर सहयोग की आवश्यकता होती है। राज्यपालों के माध्यम से विपक्ष शासित राज्यों में गतिरोध पैदा किया जा रहा है इसलिए सुप्रीम कोर्ट का यह कदम महत्व रखता है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

Supreme court finally put a check on the arbitrariness of the governors

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Apr 15, 2025 | 11:59 AM

Topics:  

  • Special Coverage
  • State Assembly
  • Supreme Court

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.