जीवन स्तर में आ गया सुधार, लोग बने खर्च करने में उदार

आज कल के दौर में लोग पहले की अपेक्षा से कहीं ज्यादा खर्च करने लगे हैं। रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली चीजों से लेकर पहनावे तक और घर से लेकर गाड़ी तक लोग दिल खोलकर खर्च कर रहे हैं। बस इसी बात पर 'पड़ोसी' और निशानेबाज के बीच चर्चा हो गई। आप भी आनंद लीजिए।
जीवन स्तर में सुधार हुआ है, लोग खर्च करने में उदार हो गए हैं
(डिजाइन फोटो)
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पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, आपने जनता के जीवनस्तर में बदलाव महसूस किया होगा। पहले लोग ब्लैक एंड व्हाइट पिक्चर देखते थे, अब कलर मूवी देखते हैं। 1984 में काला-सफेद टीवी आया था, अब घर-घर रंगीन टीवी ही नहीं, एलईडी नजर आने लगा। लोग घर में खाने की बजाय हर सप्ताह या पखवाड़े किसी ढाबे या शानदार रेस्टारेंट में जाकर खाना पसंद करते हैं। पहले नए कपड़े त्यौहारों के वक्त खरीदे जाते थे लेकिन अब लोग हर महीने या 15 दिन में ब्रांडेड परिधान खरीदते हैं।’’

पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘नवरात्रि, दशहरा, दिवाली, वसंत पंचमी, अक्षय तृतीया को नया वाहन खरीद लाते हैं। पहले अधिकांश लोगों के लिए फोर फिगर सैलेरी एक सपना था। साइकिल, रिस्टवाच और अंगूठी से आदमी की हैसियत परखी जाती थी। खेती और खुद का मकान धनवान होने की निशानी थी। तब लखपति की इज्जत होती थी। आज चतुर्थ श्रेणी आदमी लखपति हो गया है। एक अच्छा स्कूटर ही 1 लाख रुपए से ज्यादा में आता है।’’

हमने कहा, ‘‘आपको 1957 के पहले का वो जमाना याद आ रहा है जब 1 रुपए में 16 आने हुआ करते थे। लोग बातचीत के दौरान कहते थे- भैया, 16 आने सच बोल रहा हूं। वह चवन्नी अठन्नी वाला जमाना था। 1 रुपए में 8 समोसे मिला करते थे। 1947 में चांदी का 1 रुपया और 1 डॉलर बराबर कीमत के थे। 1965 में साढ़े चार रुपए का 1 डालर था। 1985 में 13 रुपए का डॉलर था और आज 83-84 रुपए डॉलर का एक्सचेंज रेट है। वक्त के साथ सब कुछ बदल गया है। पहले हवाई यात्रा और विदेश यात्रा करनेवाले लोग उंगलियों पर गिने जाते थे। अब कोई भी देश-विदेश घूमने लगा है।’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, सरकार ने जनता का जीवन स्तर सुधार दिया है। लोग कुएं की बजाय नल का पानी पीते हैं। खुद के वाहनों में घूमते हैं। 70 साल पहले पूरा मोहल्ला घूम लो तो 100 रुपए की चिल्लर नहीं मिलती थी। आज तो भिखारी भी कम से कम 10-20 रुपए की भीख लेता है।’’

हमने कहा, ‘‘सरकार की बजाय जनता ने खुद का विकास किया है। लोगों की धन कमाने और ऊंचा जीवन स्तर हासिल करने की लालसा बढ़ी है। मिडिल क्लास आदमी भी अमीरों की नकल करने लगा है। हायर-परचेस में ईएमआई भरकर कुछ भी ले आओ। पहले वेतन के भरोसे 1 महीने का खर्च भी नहीं चलता था अब परिवार में कई कमानेवाले हो गए इसलिए मनमाना खर्च करने के लिए अतिरिक्त आय या एक्सपेंडेबल इनकम बढ़ी है। फैशन और जीवन स्तर को लेकर भारत अमेरिका बनता चला जा रहा है।’’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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