Navbharat Nishanebaaz: हाथ में गंगाजल ले खाई कसम, बांटेंगे करप्शन का कमीशन

Civic Body Corruption:उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर नगर निगम के 60 पार्षदों ने हाथ में गंगाजल लेकर अवैध कमीशन को आपस में बराबर बांटने की शपथ ली। बेईमानी के लिए गंगा की सौगंध पर निशानेबाज का तीखा व्यंग्य।
Satirical illustration of UP municipal corporators holding a pot of Ganga Jal to take an oath for sharing bribery .
डिजाइन फोटो सोर्स- नवभारत
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Corporators Take Oath With Ganga Jal: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, कितनी विचित्र बात है कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की नगर निगम के विकास कार्यों से जुड़े सभी 60 पार्षदों ने हाथ में गंगाजल लेकर शपथ ली कि वह निगम से मिलने वाले अवैध कमीशन को आपस में बराबर बांटेंगे। बेईमानी और भ्रष्टाचार करने के लिए भी गंगा की सौगंध लेने में इन लोगों को तनिक भी संकोच नहीं हुआ।'

हमने कहा, 'चोरों में भी चोरी का माल आपस में बांटने के मामले में ईमानदारी रहती है. लोगों को चमड़े के कारखाने का दूषित पानी और शहरों का सीवेज गंगा में बहाते हुए शर्म नहीं आती, तो यह पार्षद तो मामूली भुट्टे चोर हैं। यह कलियुग है, जिसमें राम के नाम का चंदा चुराया जाता है और हथेली में गंगाजल लेकर करप्शन की काली कमाई आपस में बराबरी से बांटने की शपथ ली जाती है।'

Satirical illustration of UP municipal corporators holding a pot of Ganga Jal to take an oath for sharing bribery .
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पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, यह लोग अपना पाप कहां जाकर भुगतेंगे? गंगा विश्व की पवित्रतम नदी मानी जाती है। लोग श्रद्धापूर्वक गंगाजल कांवड में लाकर शिव का अभिषेक करते हैं। जीवन के अंतिम क्षण में व्यक्ति के मुख में तुलसी का पत्ता और गंगाजल डाला जाता है। गंगा से हर भारतवासी की श्रद्धा, भावना जुड़ी है। याद कीजिए कि जब गुजरात से आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश से नाता जोड़ने की ठानी थी, तो वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ते समय उन्होंने कहा था- मैं यहां नहीं आया, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है! गंगा को लेकर कितनी ही फिल्में बनी हैं जिनके नाम हैं जिस देश में गंगा बहती है, गंगा की लहरें, गंगा की सौगंध, गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो, गंगा-जमुना. अमिताभ बच्चन पर गीत फिल्माया गया था-छोरा गंगा किनारे वाला! एक और गीत है-गंगा तेरा पानी अमृत, कल-कल बहता जाए!'

हमने कहा, 'गंगा की सफाई के नाम पर नमामि गंगे प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपये का कागजी खर्च दिखाया गया, लेकिन गंगा स्वच्छ नहीं हुई। गंगा सुरसरी या देवताओं की नदी कहलाती है। पुराणों के अनुसार वह भगवान विष्णु के चरणों से निकली। राजा सगर, उनके पुत्र अंशुमान के बाद पौत्र भगीरथ के तप से गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर आई। उसका तीव्र वेग कम करने के लिए शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण किया। इसलिए वह गंगाधर भी कहलाए। गंगादीन, गंगाप्रसाद नाम भी आपने सुने होंगे। यूपी में लोग गंगा नदी को आदरपूर्वक गंगाजी कहते हैं।'

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