

SBI के करीब 4,000 ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर लीक।
ग्राहकों के नाम, जेंडर, जन्म तिथि, फोन नंबर और ईमेल आईडी डार्क वेब पर।
इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) ने बैंक को अलर्ट भेजा था।
Banking Cyber Security Alert: भारतीय स्टेट बैंक के लगभग 4,000 ग्राहकों का व्यक्तिगत विवरण साइबर अपराधियों ने चुराकर डार्क वेब पर डाल दिया है। पहले ही डिजिटल फ्राड के कितने ही मामले हो रहे हैं। अब यह जानकर लोगों को आघात लगा है कि भारतीय स्टेट बैंक के साथ भी ऐसा हो रहा है। यद्यपि ग्राहकों का डिपाजिट सुरक्षित बताया जाता है लेकिन उनकी व्यक्तिगत जानकारी या डेटा सुरक्षित नहीं होना बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। आखिर इतने बड़े बैंक में ऐसी गड़बड़ी कैसे हुई? डार्क वेब इंटरनेट का ऐसा प्रकार है जिसमें विशिष्ट सॉफ्टवेयर की मदद से प्रवेश किया जा सकता है। ग्राहकों का डेटा चुराकर उसे बेचा जा सकता है या उसे उजागर करने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया जा सकता है।
स्टेट बैंक को 16 अक्टूबर को ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर होने की चेतावनी मिली। ग्राहकों के नाम, लिंग, जन्म तारीख, फोन नंबर तथा ई-मेल आईडी की जानकारी चोरी हो जाना एक गंभीर मामला है। इस जानकारी के लीक होने से ग्राहकों की पहचान असुरक्षित हो गई है।
पहले ही लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर उनके बैंक खातों से रकम उड़ाई जाने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। डिजिटल थ्रेट 2025 रिपोर्ट के अनुसार भारत में एक वर्ष के दौरान लगभग 29,000,00 साइबर हमले हुए। ऐसी स्थिति में स्टेट बैंक की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होनी चाहिए। 2016 में कुछ बैंकों की क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी लीक हो गई थी।
साइबर अपराधों में लगातार वृद्धि होती जा रही है। इस देखते हुए बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था भी सक्षम होनी चाहिए। भविष्य में ऐसी घटनाएं न होने पाएं इसकी सावधानी रखनी होगी। ग्राहकों को इस बारे में आश्वस्त करना जरूरी है। यद्यपि साइबर हमले पूरी तरह रोके नहीं जा सकते लेकिन संदिग्ध गतिविधियों या कामकाज पर नजर रखनी होगी। साइबर हमले की पूर्व सूचना या संकेत मिलते ही नुकसान को सीमित किया जा सकता है। अत्याधुनिक तकनीक के साथ ही नियमित सुरक्षा जांच-पड़ताल की जाए और कोई कमी पाए जाने पर उसे तत्काल सुधारा जाए।
हर ग्राहक को बैंक में खाता खोलते समय विश्वास रहता है कि उसकी व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय व सुरक्षित रहेगी। इस विश्वास को कायम रखना बैंक की बुनियादी जिम्मेदारी है। डेटा चोरी जाने पर उसकी जवाबदारी ग्राहक पर नहीं डाली जा सकती। बैंकिंग व्यवस्था को अचूक और अभेद्य रखना बैंकों का दायित्व है।
इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ने 5 दिन पहले ही साइबर हमले के बारे में सूचित किया था। क्या स्टेट बैंक ने इस संबंध में कुछ उपाय किए थे? रिजर्व बैंक भी साइबर हमलों के बारे में बैंकों को सतर्क करता रहता है। इसे देखते हुए सभी बैंकों को अधिकतम सावधानी बरतनी चाहिए। भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहकों की तादाद 53 करोड़ है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा