Navabharat Nishanebaaz: यह कैसी नौटंकी, कैसा है मजमा चर्चा में आया रेणुका का चश्मा

Modi Cataract Remark: कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी 'मोदिया बिंद' लिखे चश्मे के साथ संसद पहुंचीं। उन्होंने बीजेपी और एनडीए नेताओं पर मोदी के प्रति एकतरफा नजरिए को लेकर तंज कसा।
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निशानेबाजफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Renuka Chowdhury Modi Remark: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, नौटंकी करने में विपक्षी सदस्य भी पीछे नहीं रहते। सरकार को चिढ़ाने या फिकरा कसने का कोई न कोई तरीका निकाल लेते हैं। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने यही किया। वह ऐसा चश्मा पहनकर संसद में आईं, जिसके लेंस पर 'मोदिया बिंद' लिखी हुई स्लिप चिपकी हुई थी।

संकेत यह था कि बीजेपी व एनडीए के लोगों की आंख में मोतियाबिंद या कैटरेक्ट न होकर मोदिया बिंद हो गया है। उन्हें मोदी के अलावा और कुछ भी नजर नहीं आता। उनकी मानसिकता ऐसी हो गई है कि मेरो तो नरेंद्र मोदी, दूसरो ना कोई।'

हमने कहा, 'इसके पहले भी एक बार रेणुका चौधरी चर्चा में आई थीं। जब सदन में उनके जोर से हंसने पर प्रधानमंत्री मोदी ने इस हंसी की तुलना शूर्पनखा से की थी। जहां तक रेणुका के चश्मे का सवाल है, उसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए कि कहीं वह बीजेपी की जासूसी करने वाला एआई तकनीक वाला चश्मा तो नहीं है! रेणुका के मुताबिक सड़क पर लोग ऐसे चश्मे मुफ्त में बांट रहे थे, इसलिए उन्होंने भी लगा लिया। यह चश्मा उनके लिए है, जिन्हें दिखाई नहीं देता कि देश में क्या हो रहा है। चंदा चोरी हो रही है। उन्हें अपना इलाज करवाना चाहिए,'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, भाजपा का भगवा चश्मा अपने व्यापक विस्तार को देखता है। मोदी का विजन 2047 तक है जिसमें वह भारत को विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति बनता देख रहे हैं। विश्वगुरु का यह चश्मा वर्तमान को नहीं, बल्कि भविष्य को निहारता है। कांग्रेस का चश्मा सिर्फ सरकार के दोषों और गलतियों को देखने में लगा रहता है।

चश्मा 2 प्रकार का होता है। एक पढ़ने का होता है तो दूसरा दूर की चीजें देखने का! बायफोकल चश्मा पहनो तो उसी से दोनों काम हो जाते हैं। अब लोग शीशे की बजाय फाइबर लेंस वाला चश्मा पहनना पसंद करते हैं, जो गिरने से टूटता नहीं और लेंस पर खरोंच आती नहीं।

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चश्मे के अलग-अलग फ्रेम होते हैं जैसे कि गांधी चश्मा वाले गोल फ्रेम, चौकोर फ्रेम, शेल फ्रेम, ओवल या अंडाकार फ्रेम। धनवान लोग रिमलेस या बगैर फ्रेम का नाजुक चश्मा पहनते हैं। आपको अरुण जेटली का चश्मा याद होगा।

किसी को गोल्डन फ्रेम वाला चश्मा पहनने का शौक होता है। रामायण और महाभारतकाल से लेकर मुगल और मराठा इतिहास में कहीं भी चश्मा नहीं था। अंग्रेज भारत आए और अपने साथ चश्मा लाए। नेहरू का समाजवादी और मनमोहनसिंह का नई आर्थिक नीति वाला चश्मा था। फिलहाल सत्ता का हाई पावर लेन्स मोदी-शाह के चश्मे में है। ट्रंप के पास टैरिफ वाला टेरिफिक चश्मा है।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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