

नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, मानना होगा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एक ऐसे कुशल डॉक्टर हैं जिन्होंने फर्जीवोटोमैनिया नामक रोग की पहचान की है। यह बीमारी कोविड, डेंगू या चिकनगुनिया से भी खतरनाक है। इसके संसर्ग में राहुल गांधी के बाद विपक्ष के अन्य नेता भी आने लगे हैं। जिसे इसका इन्फेक्शन हो जाता है वह बीजेपी और चुनाव आयोग की मिलीभगत का मनमाना आरोप लगाने लगता है। ऐसा करते समय यह भी नहीं सोचता कि बीजेपी महान राष्ट्रवादी पार्टी है जो चाल, चेहरा और चरित्र की गारंटी देती आई है और चुनाव आयोग परम पवित्र संवैधानिक संस्था है जिस पर शक करना पाप है।’
हमने कहा, ‘यह रोग क्या है और इसके लक्षण क्या हैं? इसकी शुरूआत कहां से हुई?’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के चुनाव में फर्जी मतदान का आरोप लगाया है। जिसके बाद महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार ने भी इस आरोप की पुष्टि करते हुए विस्फोटक खुलासा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव घोषित होने के बाद उनके पास दिल्ली में 2 दलाल 160 सीटों पर चुनाव जिताने का ऑफर लेकर आए थे।
इसके बाद उन्होंने इन दलालों की मुलाकात राहुल गांधी से भी करवा दी थी। दोनों नेताओं ने तय किया वो इस चक्कर में नहीं पड़ेंगे। यह हमारी पार्टियों का रास्ता नहीं है। हम जनता के पास जाकर उसका समर्थन मांगेंगे।’
हमने कहा, ‘देवेंद्र फडणवीस ने इस बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि पवार को राहुल का रोग लग गया है। उनकी हालत राहुल जैसी हो गई है जो सलीम-जावेद की फिल्मों की तरह मनगढ़ंत कहानियां गढ़ते हैं।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, सलीम-जावेद की लिखी जंजीर, शोले, दीवार जैसी फिल्मों की कहानियां सुपर हिट हुई थीं। कहीं राहुल और शरद पवार का बयान भी इसी तरह जनता को न लुभाए! शोले के जय-वीरू के समान इन नेताओं की जोड़ी पक्की दोस्ती की मिसाल साबित न हो! आगे चलकर अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, केजरीवाल भी ऐसी बयानबाजी से सहमत होकर कह सकते हैं- मिले सुर मेरा तुम्हारा, हो एनडीए का कबाड़ा। शक की सुई तेजी से घूमनी लगी है।’
हमने कहा, ‘सलीम-जावेद की ‘शोले’ में गब्बर सिंह खलनायक था। यहां कौनसा विलन है?’ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, राहुल गांधी शुरू से ही मोदी सरकार के जीएसटी को गब्बरसिंह टैक्स कहते आ रहे हैं।’
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा