

Rahul Gandhi Parliament Remarks: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, कुछ बातें कैरम के रिबाउंड के समान होती हैं जो सीधे तरीके से नहीं, बल्कि घुमा-फिराकर कही जाती हैं लेकिन सामने वाले के दिल पर जबरदस्त चोट करती हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी यही कुशलता दिखाई। उन्होंने एक छात्रा से हुई अपनी बातचीत का उल्लेख करते हुए सदन में स्टुडेंट, इडियट व अंधभक्त जैसे शब्दों को परिभाषित किया।
राहुल के मुताबिक एक छात्रा ने उन्हें बताया कि कुछ लोग खुद को भगवान मानते हैं। उन्हें लगता है कि सारा ज्ञान उनके अंदर से ही आता है। वे घमंडी होते हैं और किसी की बात नहीं सुनते। वे दूसरों की सच्चाई का आदर नहीं करते।
दुनिया ऐसे लोगों को इडियट कहती है।' पड़ोसी ने कहा, 'राहुल की ऐसी बातें बीजेपी व एनडीए के लोगों को बुरी तरह तिलमिला देती हैं। भक्तजन मन मसोसकर रह जाते हैं। वे आपस में कहते हैं कि पप्पू बहुत ज्यादा बोलने लगा, प्रत्यक्ष की बजाय परोक्ष रूप से हमारे आत्ममुग्ध नेता को इडियट कहने की गुस्ताखी की।'
हमने कहा, 'संसद में इसी तरह का माहौल चलता है। एक बार डॉ. राममनोहर लोहिया ने पं. नेहरू की अचकन या शेरवानी पर फब्ती कसते हुए उसे शाहजहां के तबलची की पोशाक बताया था। जहां तक इडियट शब्द की बात है, आपने वह गीत सुना होगा अंगरेजी में कहते हैं कि आई लव यू ! इस गीत में परवीन बॉबी अमिताभ बच्चन के लिए गाती है- हम तुमको समझा अक्कलवाला, तुम निकला पूरा इडियट!'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, हर नेता के लिए जरूरी नहीं कि वह पढ़ा-लिखा, ज्ञानी या विद्वान हो। पार्टी के एक नेता ने कुछ दिनों पूर्व कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था- तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। वास्तव में नेता को जानकारी नहीं थी कि यह कथन नेताजी सुभाषचंद्र बोस का था। पहले राजनीति में वकील, बैरिस्टर रहा करते थे, अब अधकचरा लोगों की भरमार हो गई है जिनकी पढ़ाई-लिखाई संदेह के घेरे में है। ये लोग कुएं के मेंढक हैं जो कुएं को ही सारी दुनिया समझते हैं।'
हमने कहा, 'इडियट का इतिहास पुराना है। एक राजकुमारी बहुत विदुषी थी जिसने शास्त्रार्थ में बड़े-बड़े विद्वानों को हरा दिया था। ये विद्वान पंडित राजकुमारी को सबक सिखाना चाहते थे। उन्होंने देखा कि एक युवक वृक्ष की उसी शाखा को काट रहा है जिस पर वह बैठा है। उसे इडियट या महामूर्ख मानकर वह राजकुमारी के पास ले गए व कहा कि यह मौन रहकर सांकेतिक भाषा में शास्त्रार्थ करता है। पंडितों ने चालाकी से युक्क को शास्त्रार्थ में जिता दिया। बाद में मूर्खता का भंडाफोड़ हुआ। आगे चलकर वही युवक महाकवि कालिदास के नाम से प्रसिद्ध हुआ।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा