

Rahul Gandhi Chakravyuh Politics: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ऐसी सधी हुई रणनीति को आगे बढ़ा रहे हैं, जो युवाओं की समस्याओं व प्रश्नों पर केंद्रित है। उनके प्रहार तीखे व सटीक हैं। वह सिर्फ विरोध की औपचारिकता नहीं निभा रहे, बल्कि वर्तमान जर्जर व्यवस्था पर प्रहार कर इंकलाब लाने का हौसला रखते हैं।
राहुल गांधी ने चक्रव्यूह का ऐसा रूपक पेश किया, जो आज की स्थितियों को चरितार्थ करता है। महाभारत में द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना कर पांडवों को चुनौती दी थी। इसमें 7 महारथियों से अकेले वीर अभिमन्यु ने मुकाबला कर उनके छक्के छुड़ा दिए थे। इस पौराणिक प्रसंग को एक ओर रख दें तो राहुल का कहना है कि बीजेपी-आरएसएस, मोदी, शाह और अदाणी मिलकर एक चक्रव्यूह चला रहे हैं।
आज के संदर्भ में चक्रव्यूह की व्याख्या करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इसका मतलब है- रोजगार बंद करो, संस्थानों पर कब्जा कर लो, पेपर लीक करो और युवाओं को रील और गिग वर्किंग में धकेल दो।
यदि विश्लेषण किया जाए तो लगेगा कि राहुल गांधी अब भावनात्मक विचार प्रवाह की बजाय तथ्यों व आंकड़ों पर आधारित संबोधन कर उस भ्रष्ट सिस्टम पर सीधे धावा बोल रहे हैं जो युवाओं को अपने अन्याय का शिकार बना रहा है। उन्होंने ज्वलंत तथ्यों को सामने रखा है कि मोदी सरकार की अनुकूलता से अदाणी की दौलत 30 गुना, बीजेपी का फंड 150 करोड़ से बढ़कर 10,000 करोड़ हो गया है।
राहुल ने युवा बेरोजगारी के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि 150 में से 1 युवा को सरकारी नौकरी मिल पाती है। 1000 में सिर्फ 12 को पक्की नौकरी मिलती है। पब्लिक सेक्टर की नौकरियां घटकर आधी रह गई हैं। एआई आ जाने से 60 प्रतिशत कॉरपोरेट जॉब खत्म हो गए हैं।
राहुल का यह प्रभावी वाक्य सबसे बड़ी पंचलाइन देता है डाटा और दर्द तुम्हारा है, दौलत उनकी है। इस पंक्ति में अर्थव्यवस्था, सोशल मीडिया, बेरोजगारी व पूंजी का केंद्रीकरण सब कुछ एकसाथ आ गया। उनका यह कथन गौर करने लायक है कि 20वीं सदी तेल व फैक्ट्री से चली, जबकि 21वीं सदी युवा और डाटा के तालमेल से चलेगी।
एआई डाटा नहीं बना सकता, डाटा युवा बनाते हैं। अगर डाटा पर युवाओं का कब्जा हो गया, तो सत्ता समीकरण बदल जाएगा। आज युवाओं को कंटेंट में उलझाकर असली डाटा कॉरपोरेट को ट्रांसफर किया जा रहा है। बीजेपी नेता कितना ही राहुल गांधी को नकारें लेकिन अपनी भारत जोड़ो यात्रा तथा समाज के जमीन से जुड़े लोगों की समस्याओं को निकट से जानने के बाद राहुल बड़ी ही ठोस और तार्किक आधार पर अपनी बात रख रहे हैं।
उनकी युवा केंद्रित रणनीति कांग्रेस ही नहीं, विपक्ष का आधार भी मजबूत करेगी, लेकिन सिर्फ इतना काफी नहीं है। बिखरे हुए विपक्ष में शीघ्र ही एकजुटता लानी होगी और न्यूनतम समान कार्यक्रम की बुनियाद पर विपक्षी पार्टियां एक प्लेटफार्म पर आ सकती हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा