नवभारत डिजाइन फोटो
Rahul Gandhi Aerospace Remark: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, व्यक्ति कभी अपनी स्थिति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता। वह जो बनना चाहता है, उसकी बजाय कुछ और बन जाता है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि अगर वे राजनीति में नहीं होते तो एयरोस्पेस कारोबारी बन जाते।’
पड़ोसी ने कहा, ‘हवाई जहाज के पुर्जे बनाने या बेचने की बजाय राहुल ऐसी राजनीति में आ गए, जहां हवा-हवाई वादे किए जाते हैं। हवा के साथ-साथ, घटा के संग-संग नेता पार्टी बदल लेते हैं। चुनाव जीतने के बाद नेता पब्लिक से दूर हो जाता है। वह कहता है- उड़नखटोले पे उड़ जाऊं, तेरे हाथ न आऊं। जनता की समस्याओं से खुद को अलग रखकर वह गुनगुनाता है-बरवादियों का जश्न मनाता चला गया, हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया।’
हमने कहा, ‘राहुल ने एयरोस्पेस का कारोबार करने की बजाय मोहब्बत की दुकान का काउंटर संभाल लिया। प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि 145 करोड़ भारतीय ही मेरा परिवार हैं जबकि राहुल गांधी ने अपने परिवार की चर्चा करते हुए कहा कि वह एक पायलट हैं, उनके पिता और चाचा भी पायलट थे। यह सब परिवार में चलता रहता है।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, समय-समय पर विदेश जाने वाले राहुल राजनीति में ठीक से टेक-ऑफ नहीं कर पाए। ले-देकर 3 राज्य कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में उनका बेस है लेकिन अधिकांश राज्यों में बीजेपी ने शान से लैंडिंग की है। राहुल यदि पायलट होने का दावा करते हैं तो भी यूपी में अखिलेश यादव और बंगाल में ममता बनर्जी उन्हें लैंड करने नहीं देते। इन राज्यों में कांग्रेस की क्रैश लैंडिंग हो जाती है। विपक्ष का ‘इंडिया’ गठबंधन ठीक से डांडिया भी नहीं खेल पाता।’
हमने कहा, ‘राहुल रहते यहां हैं लेकिन तारीफ चीन की करते हैं। उन्होंने कहा कि चीन ने एक शानदार इंडस्ट्रियल सिस्टम बनाया है जिसका दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है।’
यह भी पढ़ें:-नवभारत विशेष: वर्ल्ड कप क्रिकेट में भारत की बादशाहत बरकरार
पड़ोसी ने कहा, ‘चीन ने पाकिस्तान और ईरान को एयर वॉरफेयर के लिए ड्रोन और मिसाइल दिए लेकिन वह अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को समझ में आ गया कि चीनी हवाई हथियार नाकारा है। राहुल का सुझाव है कि यदि भारत अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखते हुए मजबूत औद्योगिक प्रोडक्शन सिस्टम खड़ा कर लेता है तो यह भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लिए बड़ी मदद होगी। लगता है, उन्होंने मोदी के मेक इन इंडिया व स्वदेशी पर गौर नहीं किया!’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा