निशानेबाज: कोई बेहोश, कोई जाता अस्पताल, सितारों के स्वास्थ्य पर सवाल

Today Nishanebaaz: फिल्मी सितारों के लिए समय प्रतिकूल चल रहा है।कोई अचानक बैलेंस जाने से गिर रहा है, कोई बेहोश हो रहा है तो किसी को अस्पताल जाने की नौबत आई।
कोई बेहोश, कोई जाता अस्पताल, सितारों के स्वास्थ्य पर सवाल
आज का निशानेबाज (सौ.डिजाइन फोटो)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, फिल्मी सितारों के लिए समय प्रतिकूल चल रहा है।कोई अचानक बैलेंस जाने से गिर रहा है, कोई बेहोश हो रहा है तो किसी को अस्पताल जाने की नौबत आई।एक जमाने में जंपिंग जैक कहलानेवाले जीतेंद्र अपने डांस के लिए मशहूर थे।श्रीदेवी के साथ ताथैया-ताथैया गाने पर मस्ती के साथ नाचते थे।हाल ही में उन्हें जरीन खान की शोकसभा में चक्कर आया और वह गिर पड़े।इसी तरह डांसिंग स्टार गोविंदा भी जिम में ज्यादा एक्सरसाइज करने के बाद बेहोश हो गए।उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।ही-मैन धर्मेंद्र अस्पताल से डिस्चार्ज के बाद घर चले गए जहां परिवारजन उनकी देखभाल करेंगे.’

हमने कहा, ‘व्यक्ति का स्वास्थ्य उसकी अवस्था के अनुसार रहता है।नाचने-कूदने और फाइटिंग सीन देनेवाले अभिनेता भी उम्र बढ़ने पर थक जाते हैं।वह नकली बत्तीसी लगाकर, बाल कलर करके अपना बुढ़ापा छुपाते हैं।जैकेट और कैप पहनकर, गले में मफलर या स्कार्फ लपेटकर गर्दन की झुर्रियां छुपाते हैं।अभिनेत्रियां खुद को कमसिन दिखाने के लिए बोटोक्स या सर्जरी करवाती हैं ताकि परी, हूर या अप्सरा दिखें।यह शो बिजनेस है वहां जो दिखता है वो बिकता है.’

पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, कोई कितना भी मेकअप कर ले लेकिन उम्र छिपती नहीं है।समय देखते ही देखते बीत जाता है।संजय दत्त और अनिल कपूर 60 वर्ष से ज्यादा के हो चुके हैं।तीनों खान सलमान, शाहरूख और आमिर भी 55 से 60 साल के बीच चल रहे हैं लेकिन उन्हें जवान हीरोइन चाहिए.’ हमने कहा, ‘पुराने जमाने की अभिनेत्री कामिनी कौशल 98 वर्ष की हैं जिन्होंने ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में शाहरूख खान की दादी का रोल निभाया था।वैजयंतीमाला भी 90 के ऊपर हैं, 92 वर्ष की आशा भोसले हैं, आशा पारेख, वहीदा रहमान व हेलन 86 साल की हैं।लंबी उम्र के साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहना चाहिए।वृद्धावस्था में सबसे बड़ा खतरा संतुलन बिगड़ने से गिरने का रहता है।बाथरूम में और सीढि़यों पर विशेष सतर्क रहना चाहिए।खुशमिजाजी और सभी से प्रेम-स्नेह रखते हुए उम्र के इस पड़ाव को मजे से जीना चाहिए.’

लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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