

AAP Punjab Election Prospects: बंगाल में अपनी विजय से उत्साहित बीजेपी अब अगले वर्ष पंजाब विधानसभा चुनाव में भी जीत का सपना देख रही है। वहां पंजाबी हिंदू समाज में बीजेपी का प्रभाव था, लेकिन अब सिखों को भी साथ लेने के लिए कृषि प्रधान मालवा क्षेत्र के सिख जाट नेता को उसने प्रदेशाध्यक्ष बनाया है। इस क्षेत्र में विधानसभा की 69 सीटें हैं। बीजेपी के प्रयास अपनी जगह हैं लेकिन तथ्य यह है कि पंजाब में अब भी आम आदमी पार्टी की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
राघव चड्डा सहित 7 सांसदों के बीजेपी में शामिल हो जाने, उद्योगमंत्री संजीव अरोड़ा की ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद भी 'आप' ने पंजाब के स्थानीय निकाय चुनाव में निर्णायक जीत हासिल की। इसमें यही लगता है कि अगला विधानसभा चुनाव भी 'आप' ही जीतेगी, पंजाब में 4 वर्ष पूर्व हुए विधानसभा निर्वाचन में कुल 119 में से 92 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी ने इतिहास रचा था।
वहां मुख्यमंत्री भगवंत मान को चुनाव घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। राज्य की कुल आय की तुलना में कर्ज का बोझ अधिक है। इतने पर भी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार अगले महीने से राज्य की महिलाओं को 1,000 से 1,500 रुपए तक की आर्थिक सहायता देने जा रही है। जब दिल्ली में केजरीवाल व उनके मंत्रियों पर संकट के बादल छाए थे, तब भी पंजाब में 'आप' की सरकार चलती रही।
नेताओं की गिरफ्तारी, शराब घोटाले के आरोप, केजरीवाल के शीशमहल को लेकर आलोचना का नतीजा यह हुआ कि दिल्ली में 'आप' को 10 वर्ष से चली आ रही सत्ता गंवानी पड़ी। बाद में केजरीवाल व उनके सहयोगी अन्य नेता शराब घोटाले के आरोपों से निर्दोष मुक्त हो गए, राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने वाली 'आप' के राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंता व्याप्त हो गई थी, लेकिन पंजाब के महापालिका, नगरपालिका, जिला परिषद व पंचायत समिति चुनावों में 'आप' की जबरदस्त जीत ने दिखा दिया कि शहरी ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस पार्टी का प्रभाव कायम है।
मनपा के कुल 1977 प्रभागों में से 958 प्रभागों में 'आप' के प्रत्याशी विजयी हुए, 75 में से 40 नगरपालिकाओं में 'आप' को बहुमत मिला। पंजाब के इन चुनावों में बीजेपी 5 वें स्थान पर रही। इस स्थिति के बावजूद बीजेपी की चुनाव मशीनरी सक्रिय हो गई है। पंजाब में अकाली दल से पुनः तालमेल करने की कोशिश हो सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने का पार्टी को खास लाभ नहीं हुआ।
बीजेपी का प्रयास रहेगा कि राघव चड्डा सहित जो 'आप' सांसद बीजेपी में आए हैं, वह अभी से पंजाब में बीजेपी को मजबूत बनाने में जुट जाएं। लुभावनी योजनाओं और वादों में बीजेपी कोई कसर बाकी नहीं रखेगी। पंजाब के किसान वर्ग का आंदोलनकारी रवैया केंद्र की मोदी सरकार देख चुकी है। अगले वर्ष की शुरूआत में विधानसभा चुनाव को देखते हुए किसानों को फसल का लाभप्रद मूल्य तथा अन्य सहायता देने का वादा किया जा सकता है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा