Navbharat Nishanebaaz: क्यों खास है 99 का आंकड़ा? राजनीति, क्रिकेट और बाजार में दिखता है इसका असर

Nervous 99 Psychology: राजनीति से क्रिकेट और बाजार तक 99 का आंकड़ा खास है। नेता 99 से 100 तक पहुंचने की कोशिश करते हैं, बल्लेबाज नर्वस 99 से जूझते हैं व कंपनियां कीमत को 3000 के बजाय 2999.99 रखती हैं।
Why 99 Feels Incomplete
निशानेबाजफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Why 99 Feels Incomplete: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, राजनीति में हमेशा 99 का फेर बना रहता है। हर नेता अपने 99 के आंकड़े को 100 में बदलने के लिए प्रयत्नशील रहता है।'

हमने कहा, '99 अंक व्यक्ति की साइकोलॉजी से जुड़ा है। कितने ही बल्लेबाज 99 रन बनाने के बाद सेंचुरी बनाते समय नर्वस हो जाते हैं। उन्हें अज्ञात भय सताने लगता है कि कहीं गेंद हिट करने के चक्कर में आउट न हो जाएं। बड़ी मुश्किल से वह 1 रन निकाल पाते हैं। इसे नर्वस 99 कहा जाता है। बाटा के जूते की कीमत 2999.99 रुपए लिखी रहती है। ग्राहक को यह दाम किफायती लगे इसलिए पूरा दाम 3,000 रुपए नहीं लिखा जाता। रेडीमेड ड्रेस के दाम में भी यही खेल किया जाता है।'

पड़ोसी ने कहा, '99 का आंकड़ा व्यक्ति को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। किसी को 99 रुपए दो तो वह खर्च करने की बजाय उसे 100 बनाने की सोचेगा। महाराष्ट्र में पिछले विधानसभा चुनाव के समय बीजेपी ने उम्मीदवारों की जो पहली सूची जारी की थी उसमें 99 नाम थे। आपको मालूम है कि लोकसभा में कांग्रेस के कुल 99 सदस्य हैं। अब आप हमें यह बताइए कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस 99 के फेर में क्यों फंसे हैं कि 2029 के पहले दिल्ली नहीं जाना चाहते?'

हमने कहा, 'मुंबई मायानगरी है जो भारत की आर्थिक राजधानी है। वहां शेयर मार्केट है और बॉलीवुड भी! यदि दिल्ली को वाशिंगटन डीसी के समान ऐतिहासिक इमारतों वाला शहर माना जाए तो मुंबई भी न्यूयार्क के समान ग्लेमरस है। मुंबई छोड़कर कोई वायु प्रदूषण वाली दिल्ली क्यों जाएगा?'

हमने कहा, 'दिल्ली दिलवालों की है। दिल्ली से दिल लगाने के लिए मोदी और शाह गुजरात से वहां चले आए। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने भी नारा दिया था दिल्ली चलो!'

Why 99 Feels Incomplete
कांग्रेस समेत अजित पवार, शरद पवार ने महाराष्ट्र के प्रथम मुख्यमंत्री यशवंतराव बलवंतराव चव्हाण को श्रद्धांजलि दी

पड़ोसी ने कहा, 'देवेंद्र फडणवीस मुंबई में खुद को कम्फर्टेबल महसूस करते हैं। आपको याद होगा कि चीन के हमले के समय महाराष्ट्र के प्रथम मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिल्ली बुलाकर रक्षा मंत्री बनाया था। तब कहा गया था कि हिमालय की मदद के लिए सह्याद्रि दौड़ा चला गया। यशवंतराव तो क्या महाराष्ट्र का कोई नेता अब तक प्रधानमंत्री नहीं बन पाया। इसलिए दिल्ली जाने से क्या फायदा? अपने राज्य की हुकूमत ही भली !'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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