

Mumbai Antwerp Economic Partnership: भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से उत्पन्न होने वाले वैश्विक अवसरों को प्रत्यक्ष निवेश और रोजगार में बदलने के लिए महाराष्ट्र पूरी तरह तैयार है। मुंबई में आयोजित भारत-बेल्जियम उच्चस्तरीय संवाद के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस ऐतिहासिक आर्थिक साझेदारी को सफल बनाने में महाराष्ट्र सबसे प्रमुख भागीदार बनेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बेल्जियम और महाराष्ट्र के बीच 'मुंबई-अंटवर्प' औपचारिक आर्थिक साझेदारी विकसित करने का दूरदर्शी प्रस्ताव रखा।
बेल्जियम के उद्योगपतियों और शीर्ष प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र की मजबूत औद्योगिक व्यवस्था, विशाल बाजार क्षमता और कुशल मानव संसाधन को बेल्जियम के निवेशकों के लिए मुफीद बताया। उन्होंने दोहराया कि राज्य को वर्ष 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर (एक खरब डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में यह साझेदारी मील का पत्थर साबित होगी।
इन 5 प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री फडणवीस ने द्विपक्षीय सहयोग को गति देने के लिए 5 रणनीतिक क्षेत्रों को चिह्नित किया:
उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing) और हरित उद्योग
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स
स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy)
दवा एवं जैव प्रौद्योगिकी (Pharma & Biotech)
बंदरगाह और रसद (Ports & Logistics)
उन्होंने विश्व प्रसिद्ध बेल्जियम सेमीकंडक्टर अनुसंधान संस्थान 'आईमेक' (IMEC) और महाराष्ट्र के शोध संस्थानों के बीच अनुसंधान आधारित साझेदारी का विशेष सुझाव दिया।
बंदरगाह तकनीक और 'मुंबई-एंटवर्प' आर्थिक कॉरिडोार
प्रस्तावित साझेदारी के तहत एंटवर्प-ब्रुग्स बंदरगाह और महाराष्ट्र राज्य के बंदरगाह नेटवर्क के बीच हरित नौवहन, हाइड्रोजन ईंधन और उन्नत लॉजिस्टिक्स तकनीक को साझा करने पर सहमति जताई गई। कार्यक्रम में बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए से दुनिया की करीब 2 अरब आबादी का विशाल बाजार आपस में जुड़ेगा, जिससे नवाचार और रोजगार के अप्रत्याशित अवसर पैदा होंगे। वहीं केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा कि इस समझौते से देश के किसानों, स्टार्टअप्स, छोटे उद्योगों और सेवा क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।