नवभारत निशानेबाज: ट्रंप की बेरुखी का पाक पर असर खुद को बताया टॉयलेट पेपर

Pakistan US Tensions: अमेरिका से दूरी और भारत से बढ़ती नजदीकी से बौखलाए पाकिस्तान ने संसद में ट्रंप पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। यह उसकी कूटनीतिक विफलता और आर्थिक हताशा का प्रतीक है।
Navbharat Shooter: Trump's indifference has an impact on Pakistan, calling himself toilet paper
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Pakistan US Relations Crisis: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने मुल्क की संसद नेशनल असेंबली में वीभत्स रस वाली बात कही। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने हमें टॉयलेट पेपर बना दिया। जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया और फिर फेंक दिया। हमने कहा, 'अपने देश की इतनी गंदी तुलना करना दिखाता है कि पाकिस्तानी नेता कितनी हताशा में डूबे हैं। पाकिस्तान खुद परजीवी या पैरासाइट रहा है। पहले कहा जाता था कि अल्लाह, आर्मी और अमेरिका पाकिस्तान को चलाते हैं। जब अमेरिका ने मुफ्तखोरी की रोटी के टुकड़े डालना बंद कर दिया तो वहां के कहा, 'पाकिस्तान 2 नावों पर सवारी का नतीजा भुगत रहा है। अमेरिका और चीन दोनों की एक साथ चमचागिरी करना उसे महंगा पड़ा। पाकिस्तान को जलन इस बात की है कि अमेरिका भारत के करीब आ रहा है और बिजनेस डील कर रहा है। विश्व बैंक और आईएमएफ की खैरात पर पलनेवाले कंगाल व फुकटखोर पाकिस्तान से कौन व्यापार करार करेगा? वह तो खुद ही आर्थिक और फौजी मदद के लिए बेशर्मी से हाथ पसारता आया है। अमेरिका की यह गलतफहमी दूर हो गई कि रूस और चीन के खिलाफ पाकिस्तान उसकी चौकी है।'

हमने कहा, 'ट्रंप पहले किसी को चने के झाड़ पर चढ़ा देते हैं और फिर उसे करारा झटका देते हैं। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को महान सेनापति कहा और डिनर पर बुलाया। मुनीर और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप को दुर्लभ खनिज का बक्सा गिफ्ट में दिया लेकिन अब अमेरिका पाकिस्तान को उसकी औकात बता रहा है। यह चीन से चिपकने का नतीजा है। उसकी वफादारी पर ट्रंप को शक हो गया है। पाकिस्तानी रक्षामंत्री ने कहा कि हमने अमेरिका के हितों के लिए जंग लड़ी और तालिबान के खिलाफ जाकर अमेरिका का साथ दिया लेकिन बदले में अमेरिका ने पाकिस्तान का टायलेट पेपर जैसा इस्तेमाल करने के बाद उसे कूड़े में फेंक दिया।'

पड़ोसी ने कहा, 'पाकिस्तान ने खुद स्वीकार कर लिया है कि वह वास्तव में क्या है। मुफ्तखोर व भिखमंगे देश की कोई इज्जत नहीं रहती।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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