

India Pakistan Indus Waters Treaty Dispute: आखिर क्या बात है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान किसी भी स्तर पर बैकफुट पर आने की जगह उल्टे हावी होने की कोशिश कर रहा है? आखिर पाकिस्तान के इस जुमले का क्या मतलब है कि पानी रोका तो हाथ काट देंगे? भारत ने सिंधु जल संधि को तो स्थगित कर ही रखा है और पाकिस्तान ने पिछले एक साल से भी ज्यादा समय में आखिर इसको लेकर क्या किया है?
हाल के महीनों में पाकिस्तान के कुछ नेताओं और सैन्य अधिकारियों की ओर से सिंधु जल, सैन्य शक्ति और भारत के खिलाफ बार-बार तीखे बयान सामने आए हैं। मसलन, पानी रोका तो हाथ काट देंगे, खून और पानी साथ-साथ बहेगा? जैसे बयान स्वाभाविक रूप से सवाल पैदा करते हैं कि आखिर पाकिस्तान किस गलतफहमी में भारत के साथ इन दिनों इस तेजाबी जुबान से बात करने की हिम्मत कर रहा है? क्या इसका कारण ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसका बढ़ा हुआ सैन्य आत्मविश्वास है या फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान मसले पर उसे दिया गया गैरजरूरी भाव उससे नहीं संभल रहा?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही अपने-अपने सैन्य तरीके से सफलता का दावा किया। पाकिस्तान का तो सिर्फ दावा ही था, लेकिन भारत के दावे को तो पूरी दुनिया ने देखा है कि किस तरह पाकिस्तान के कई महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ध्वस्त हो गए थे। हालांकि पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारत के 6 रफाल विमान मार गिराए थे। लेकिन आजतक किसी एक रफाल विमान के गिराए जाने का कोई सबूत दुनिया के सामने पेश नहीं कर पाया।
पाकिस्तान की माली हालत काफी पहले से बहुत खराब है। राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद की चुनौती, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वां की सुरक्षा समस्या उसके सामने बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे समय में भारत के खिलाफ कठोर भाषा का इस्तेमाल दरअसल वह अपने घरेलू दर्शकों को यह संदेश देने का माध्यम भी बनता है कि 'सेना और सरकार कमजोर नहीं हैं।
भारत ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस बात को लेकर सहज हो गया है कि भविष्य में भी वह आतंकवादी हमलों के बाद सीमित सैन्य कार्रवाई करने के लिए न केवल तैयार है, बल्कि जरा भी झिझक नहीं दिखाएगा। भारत अभी भी सिंधु जल संधि को लेकर अपने कठोर निर्णय पर अडिग बना हुआ है कि सिंधु जल समझौता नहीं होगा। जबकि सिंधु जल संधि का मामला पाकिस्तान में केवल जल सुरक्षा की चिंता नहीं है। यह पाकिस्तान की कृषि और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा का भी बड़ा मसला है। इसलिए जल संबंधी मुद्दों पर पाकिस्तान को भाषा रह-रहकर आक्रामक हो जाती है।
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पाकिस्तान हवा-हवाई बातें चाहे जितनी कर ले, लेकिन वह भारत को आंख दिखाने की हैसियत में नहीं है। तो क्या पाकिस्तान को अमेरिका से कोई आश्वासन मिला है, जिसके कारण वह अचानक इस कदर चौड़ा होने लगा है? अमेरिका, भारत की कीमत पर पाकिस्तान को हवा नहीं दे सकता। क्योंकि ठीक इसी समय अमेरिका को हिंद महासागर में चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति की भी चिंता है। इसलिए वो भारत को पाकिस्तान पर बढ़त देने के लिए अनदेखी नहीं कर सकता। कहीं न कहीं लगता है कि यह - पाकिस्तान का मनोवैज्ञानिक पैंतरा है। क्योंकि आज के संघर्ष में केवल मिसाइलें या लड़ाकू विमान ही नहीं लड़ते, मीडिया, सोशल मीडिया, प्रेस कॉन्फ्रेंस, एक्स, जैसे प्लेटफॉर्म भी युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं। पाकिस्तान इसी मंच को उपयोग करते हुए अपनी घरेलू समस्याओं से अपने नागरिकों का ध्यान हटाने के लिए भारत को धमकाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान के लिए यह तरकीब काम नहीं आएगी। पाकिस्तान के भौंकने का भारत में कोई असर नहीं पड़ेगा - और विश्व मंच पर तो इससे जूं तक नहीं रेंगेगी।
-लेख विजय कपूर द्वारा