

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 'क्राइम और अपराध' को अलग बताने वाले बयान पर व्यंग्य किया गया है।
लेख में उनकी भाषा और राजनीतिक योग्यता पर सवाल उठाए गए हैं।
तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके मुख्यमंत्री बनने पर निशाना साधा।
पूरे लेख में बिहार की राजनीति और अपराध के मुद्दे पर कटाक्ष किया गया है।
Samrat Chaudhary Crime Statement Controversy: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अनोखा प बयान देते हुए कहा कि हमारे यहां कोई अपराध नहीं है। अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो चुका है। क्राइम हो सकते हैं लेकिन अपराध नहीं! बिहार में कोई अपराधी नहीं है।'
हमने कहा, 'इस बात को समझ लीजिए कि राजा-महाराजा गलत हो सकते हैं, लेकिन 'सम्राट' नहीं! सम्राट जो कह दे, उसे ही परम सत्य मान लें और कोई शंका न करें, बिहार के इस सम्राट का राज्याभिषेक करने के लिए मोदी-शाह ने नीतीशकुमार को सीएम पद से हटाया और राज्यसभा का सदस्य बनवाकर उनकी राजनीतिक ताकत खत्म कर दी। नीतीश के बेटे को भी कोई पद नहीं दिया गया।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, मुख्यमंत्री पद पर कैसे अनपढ़ व्यक्ति को बिठाया गया है, जो यह नहीं जानता कि क्राइम और अपराध दोनों शब्दों का मतलब एक ही है। जो क्रिमिनल है वही अपराधी भी है। अपराध विज्ञान को ही अंग्रेजी में 'क्रिमिनोलॉजी' कहा जाता है। एक चपरासी बनने के लिए भी कुछ समझ और योग्यता जरूरी है। यहां तो ऐसा व्यक्ति सीएम बना दिया गया, जो क्राइम और अपराध को अलग-अलग बता रहा है। इस अजीबोगरीब बयान की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट को गंभीरता से विचार कर इसकी न्यायिक व्याख्या करनी चाहिए।'
हमने कहा, 'विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि 7 लोगों की हत्या के मामले में सम्राट चौधरी को पुलिस ने नामजद किया था। ऐसे आपराधिक छवि के मुख्यमंत्री के अधीन काम करके आईएएस और आईपीएस अधिकारी गौरवान्वित अनुभव कर रहे हैं या अपमानित ? तेजस्वी ने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री ने चौधरी को बिहार नष्ट करने की सुपारी दी है?'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, राजनीति में नेता का दबंग होना ही उसकी योग्यता मानी जाती है। उसका पढ़ा-लिखा, ज्ञानी या विद्वान होना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। बीजेपी ने सोचा कि तेजस्वी से निपटने के लिए ऐसा ही अक्खड़ मुख्यमंत्री बनाना उचित रहेगा। सम्राट चौधरी के बयान के बाद अब पुलिस थाने में भी केस दर्ज करते समय दरोगा को सोचना होगा कि कोई गुंडा-बदमाश, अपहरणकर्ता अपराधी है या क्रिमिनल ? मामला सेटल कर उसे यह कहकर छोड़ा जा सकता है कि बिहार में कोई अपराध तो है ही नहीं!'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा