

Nepal Tibet Border Glacier Burst: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर 26 अगस्त की सुबह लगभग 8 बजकर 37 मिनट पर तेज झटके महसूस किए गए। अमेरिकी भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने इसे 4।4 तीव्रता का भूकंप माना। लेकिन कुछ ही घंटों बाद यह बात सामने आई कि यह भूकंप नहीं, वास्तव में ये झटके ग्लेशियर के एक बड़े हिस्से के बर्फ और चट्टान सहित ल्हेंदे खोला नदी में टूटकर गिर जाने की वजह से आए। ल्हेंदे खोला नदी, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है।
भोटेकोशी नदी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। इस जलप्रलय की भयावहता को देखकर पूरी दुनिया सहम गई है। इस तबाही में सैकड़ों लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 2100 से ज्यादा लोग लापता थे, जिसमें 300 भारतीय, 550 तिब्बती, 826 नेपाली तथा अन्य विदेशी लोग थे। जानकारों को आशंका है कि इससे कहीं ज्यादा लोग इस जलप्रलय के शिकार हो सकते हैं। अभी तक इस भयावह त्रासदी में जान गंवाने वाले जिन लोगों के शव बरामद हुए हैं, उनमें से 165 नेपाली और 3 तिब्बती लोगों की पुष्टि हुई है।
इस जलप्रलय के जो वीडियो सामने आए हैं, वे इस कदर रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं कि पूरी दुनिया में भय की लहर दौड़ गई है। तिब्बत-चीन सीमा पर बने ग्यिरींग पोर्ट के 5 मंजिला इमिग्रेशन कॉम्प्लेक्स में जब लोगों ने खतरे को भांपकर भागने की कोशिश की, तो पलक झपकते मलबे की लहरों ने कॉम्प्लैक्स को अपने में समेटते हुए ताश के महल की तरह चकनाचूर कर दिया। तिब्बत से निकला यह भयावह जलप्रलय नेपाल को अपने आगोश में समेटते हुए अब भारत की तरफ आगे बढ़ रहा है। 27 अगस्त की सुबह 11 बजे तक नेपाल की त्रिशूली नदी से होते हुए जलप्रलय की बाढ़ बिहार में बहने वाली गंडक नदी तक पहुंच गई थी, जिसमें लोगों ने देखा है कि मलबे के साथ भैंस और फ्रिज तक बह रहे थे।
26-27 अगस्त की रात 12 बजे नेपाल की ओर से करीब 150 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसके लिए बगहा स्थित गंडक बैराज के 36 गेट खोल दिए गए। नेपाल की इस तबाही से भारत में बिहार के कई जिलों को अलर्ट पर रखा गया है, जिनमें पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के साथ सीतामढ़ी और शिवहर को भी अलर्ट कर दिया गया है।
बिहार के बाद बाढ़ का यह पानी उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर को भी अपनी चपेट में ले सकता है। इसलिए यहां भी अलर्ट जारी किया गया है। इस भयावह त्रासदी के बाद भारत नेपाल को राहत सामग्री की दो खेप भेज चुका था। भारतीय वायु सेना के विमानों से भेजी गई दूसरी खेप में 37।5 टन की राहत सामग्री दवाईयां और खाद्य पैकेट शामिल थे। जबकि इसके पहले भारत ने बुधवार की रात ही सी-130 जे विमान के जरिए 10 टन त्वरित राहत सामग्री भेजी थी, जिसमें प्रमुखता से जरूरी दवाईयां थीं।
जिस तरह से हिमालय की बर्फ तेजी से पिघल रही है, वह सिर्फ भविष्य में पानी का संकट नहीं खड़ा करेगी, उसके पहले ग्लेशियर लेक आउटब्रस्ट फ्लड अर्थात हिम नदीय झीलों के फटने से अचानक आने वाली बाढ़ का जबरदस्त खतरा भी पैदा हो गया है।
-लेख लोकमित्र गौतम द्वारा