

Navbharat Nishanebaaz: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से पहले भी कहा था और आज भी कह रहे हैं कि आज का समय युद्ध का नहीं है। उनकी बात पर पुतिन गंभीरता से गौर क्यों नहीं करते?'
हमने कहा, 'समय तो हमेशा युद्ध और संघर्षों का रहा है। युद्ध न हो तो इतिहास फीका पड़ जाएगा। उसमें वीर राजाओं और महान योद्धाओं के नाम कैसे आएंगे? आपने भी हल्दी घाटी की लड़ाई और पानीपत के 3 युद्धों के बारे में इतिहास को किताब में पढ़ा होगा। हमारे देश के राजाओं को 3 शौक थे। या तो वे पड़ोसी राजा से युद्ध करते थे नहीं तो शिकार या जुआ खेलते थे। राजा नल और युधिष्ठिर पक्के जुआरी थे। युद्ध भी गैम्बलिंग के समान है। पुतिन ने सोचा था कि एक-दो माह में यूक्रेन को घुटनों पर ला देंगे, लेकिन उनका अनुमान गलत निकला।
डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने देश को इंरान युद्ध में फंसा दिया, जो खत्म ही नहीं हो रहा है। अमेरिका की इकोनॉमी के लिए जरूरी है कि विश्व में कहीं न कहीं युद्ध होता रहे ताकि उसके हथियार बनाने वाले उद्योगों को काम मिलता रहे। कोरिया युद्ध, वियतनाम की लड़ाई, अफगानिस्तान से युद्ध, इराक में सद्दाम हुसैन का सफाया और अब ईरान से लड़ाई यही दशर्शाते हैं कि अमेरिका के लिए हर समय युद्ध का है। युद्ध होता है तो मीडिया को खबरें मिलती हैं। कहते हैं- युद्धस्य वार्ता रम्या अर्थात लड़ाई की खबर मनोरंजक लगती है।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, कुछ देश भले ही युद्ध करें लेकिन भारत ने दुनिया को बुद्ध दिया है, जो शांति और करुणा के महान संदेशवाहक थे। मोदी भी शांति और संयम की सीख दे रहे हैं।'
हमने कहा, 'युद्ध तो भगवान कृष्ण भी नहीं रुकवा पाए थे। उन्होंने पांडवों के दूत के रूप में दुर्योधन से कहा था कि 5 पांडवों को सिर्फ 5 गांव दे दो तो लड़ाई नहीं होगी। दुर्योधन ने जवाब दिया था- केशव, बिना युद्ध के मैं सुई की नोक के बराबर भी जमीन नहीं दूंगा। ऐसे में महाभारत होकर रहा। सारे युद्ध जर (संपत्ति), जोरू (स्त्री) या जमीन के लिए हुए। हिटलर का युद्धोन्माद अब ट्रंप, पुतिन, नेतन्याहू, हिजबुल्लाह के दिमाग पर सवार है। उनके लिए हर समय युद्ध और खून-खराबे का है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा