

NTA Exam Reform Taskforce: देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नंदन द नीलकेणी के नेतृत्व में उच्चाधिकार संपन्न टास्क फोर्स या कृतिदल नियुक्त किया गया है। नीट पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन व शिक्षामंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह उल्लेखनीय कदम है। आधार कार्ड योजना को सफल बनाने वाले नीलकेणी को परीक्षा प्रणाली सुधार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
इसके पहले 2024 में भी नीट का पेपर फूटा था। उसके बाद के। राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित समिति ने 101 सिफारिशें की थीं। नीट सहित देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं लेने वाली संस्था एनटीए ने इन सिफारिशों को पूरी तरह लागू नहीं किया।
इन सिफारिशों में कहा गया था कि मनुष्यबल बढ़ाकर जिला स्तर पर समितियां बढ़ाई जाएं, ठेकेदारों की भूमिका कम करते हुए प्रौद्योगिकी का अधिक इस्तेमाल किया जाए।
क्या नीलकेणी की अध्यक्षता वाला नया टास्क फोर्स राधाकृष्णन समिति की बकाया सिफारिशों को लागू करवाना चाहेगा या नई सिफारिशें देगा? उम्मीद यही है कि नीलकेणी परीक्षा प्रणाली में सुधार का कोई ऐसा स्थायी उपाय सुझाएं जिससे पेपर लीक न होने पाए। हमारी शिक्षा प्रणाली छात्र केंद्रित न होकर सिस्टम केंद्रित है। विद्यार्थी वर्ष भर पढ़ाई करके परीक्षा देते हैं।
फेल हो जाने पर उनका 1 वर्ष बर्बाद हो जाता है। ऐसा न होकर वर्ष में 4 बार परीक्षा लेनी चाहिए ताकि छात्रों का परिश्रम व समय बेकार न जाए। लगभग 2 दशक पूर्व प्रो। यशपाल की अध्यक्षता वाली समिति ने यह मुद्दा रखा था जिसमें कहा गया था कि विद्यार्थियों पर अतिरिक्त तनाव कम किया जाए।
इस दिशा में कुछ नहीं किया गया। नीट, जेईई जैसी परिक्षाओं में बैठने वाले छात्रों की तादाद चौगुनी हो गई और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई। कोचिंग क्लास के रूप में शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया। इस वजह से पेपर लीक की घटनाएं होने लगीं। 20 लाख छात्रों का भविष्य कुछ घंटों की परीक्षा में तय हो जाता है। लिखित परीक्षा में प्रश्नपत्र की छपाई, परिवहन, सुरक्षित रखना और हजारों केंद्रों में वितरित करने की प्रक्रिया पेपर लीक के जोखिम को बढ़ा देती है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा सही है लेकिन देश में एक परीक्षा सत्र के लिए केवल 2.5 लाख कंप्यूटर टर्मिनल हैं जबकि परीक्षा में एक साथ 10 लाख से ज्यादा छात्र बैठते हैं। इसलिए परीक्षा 2 या अधिक चरणों में ली जाए।
छात्रों को 2 अवसर दिए जाएं ताकि बेहतर स्कोर हासिल करने का मौका मिले। व्यापक प्रश्न बैंक बनाया जाए। एनटीए को यूपीएससी के समान ढांचा उपलब्ध कराया जा सकता है। राष्ट्रीय परीक्षा इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करना आवश्यक है। साथ ही पारदर्शिता व विश्वास की बहाली की जाए। कोचिंग सेंटर ने स्कूलों की अहमियत कम कर दी है जिसे पुनः बहाल किया जाए।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा