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नवभारत विशेष: पूरी दुनिया में संघ जैसा कोई दूसरा संगठन नहीं

RSS Vision India: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि RSS न सत्ता चाहता है, न लोकप्रियता। उसका लक्ष्य विरोध नहीं, बल्कि मूल्यों के जरिए दुनिया को प्रेरित करने वाला भारत बनाना है।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Feb 17, 2026 | 07:20 AM

प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )

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Mohan Bhagwat RSS Vision: मोहन भागवत ने कहा कि संघ किसी संगठन की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है। संघ किसी का विरोध करने के लिए भी नहीं है। संघ को पावर और पापुलैरिटी भी नहीं चाहिए, जितने भी अच्छे काम देश में चल रहे हैं वे बिना किसी का विरोध किए ठीक से हो जाएं, यही संघ का उद्देश्य है। संघ इसी दिशा में काम कर रहा है।

देश में बहुत से संगठन, संस्थाएं और दल हैं, उनके साथ संघ को बिठाकर देखेंगे तो गलतफहमी होती है। संघ को ऊपर ऊपर से या दूर से देखने पर भी गलतफहमी होती है क्योंकि तब आप हमारे कार्यक्रम भर देखते हैं। संघ को समझने के लिए संघ के अंदर आकर उसका हिस्सा बनना होगा। संघ की किसी से तुलना नहीं की जा सकती।

संघ प्रमुख ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत एक बड़ी ताकत के रूप में अपनी पहचान बना चुका है परन्तु हम महाशक्ति नहीं बनना चाहते। क्योंकि महाशक्ति दूसरों को डराती है, दूसरों पर दबाव डालती है। हम विश्व देव बनना चाहते हैं, जो दुनिया के लिए मिसाल बने, प्रेरणा दे और नेतृत्व करें।

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हम बाहर से नहीं भीतर से नेतृत्व करना चाहते हैं। हम अपने काम, मूल्यों और उदाहरण से दूसरों को रास्ता दिखाना चाहते हैं। हमारा लक्ष्य डराने का नहीं बल्कि प्रेरित करने सबको साथ लेकर चलने का है।

संघ प्रमुख ने अपने व्याख्यान में हिंदुओं की चार किस्में बताते हुए कहा कि पहले वो जो कहते हैं कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं। दूसरी किस्म में वो आते हैं जो कहते हैं कि इसमें गर्व की क्या बात है।

तीसरी किस्म उनकी है जो कहते हैं धीरे बोलो कि हम हिंदू हैं और चौथी किस्म उन हिंदुओं की है जो अपनी हिंदू पहचान भूल गए हैं या उन्हें दिया गया है। संघ प्रमुख ने हिंदू मुस्लिम एकता के नारे को भ्रामक बताते हुए कहा कि जब हम पहले से ही एक हैं तो यह नारा अनावश्यक है।

संघ प्रमुख ने कहा कि भुला हिंदुत्व को अपनाने के लिए किसी को अपनी भाषा, धर्म या सांस्कृतिक रीति रिवाज छोड़ने की जरूरत नहीं है। हिंदुत्व सुरक्षा की गारंटी देता है। संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि हिंदू शब्द धार्मिक पहचान नहीं संघ प्रमुख ने इस अनूठे संवाद कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रबुद्ध श्रोताओं के चुनिंदा प्रश्नों के उत्तर भी दिए।

एक प्रश्न के उत्तर में संघ प्रमुख ने कहा कि स्वातंत्र्य वीर सावरकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न दिया जाना चाहिए। यदि उनको यह सम्मान प्रदान किया जाता है तो इससे सम्मान की प्रतिष्ठा और गौरव ही बढ़ेगा।

सावरकर तो बिना किसी सम्मान के लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मोहन भागवत ने कहा कि संघ का सरसंघचालक कोई ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र नहीं बन सकता।

एससी, एसटी का व्यक्ति भी नहीं बन सकता। सरसंघचालक बनने की एक मात्र शर्त यह है कि कोई हिंदू ही सरसंघचालक बन सकता है। संघ प्रमुख ने कहा कि 75 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद उन्हें पद छोड़ने की अनुमति संघ से नहीं मिली, इसलिए वे सरसंघचालक पद पर बने हुए हैं। उनके पद छोड़ने का फैसला संघ को करना है। जब तक संघ से अनुमति नहीं मिलेगी वे अपना पद नहीं छोड़ सकते।

पद छोड़ने के बाद भी संघ के कार्यकर्ता बने रहेंगे। संघ का कार्यकर्ता कभी रिटायर नहीं होता। वह शरीर में रक्त की अंतिम बूंद तक समाज सेवा के काम में लगा रहता है।

मोहन भागवत ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि अंग्रेजी भाषा को संघ की कार्यप्रणाली में संचार का माध्यम नहीं बनाया जाएगा, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है लेकिन जहां आवश्यकता होगी वहां इसका प्रयोग किया जाएगा।

यह भी पढ़ें:-नवभारत निशानेबाज: आज चल रही है स्पेस एज लेकिन राजनीति में परसेंटेज

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संघ ने देश के प्रमुख नगरों में संवाद कार्यक्रमों की जो श्रृंखला प्रारंभ की है, उसके अंतर्गत गत दिनों महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक व्याख्यान माला का आयोजन किया गया।

इसका विषय था संघ यात्रा के 100 वर्ष नये क्षितिज’ इस दो दिवसीय गरिमामय आयोजन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के काम को अनोखा बताते हुए कहा कि दुनिया में इस तरह का काम करने वाला कोई दूसरा संगठन नहीं है।

–लेख कृष्णमोहन झा के द्वारा

Mohan bhagwat rss vision global leadership

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Published On: Feb 17, 2026 | 07:20 AM

Topics:  

  • Cultural
  • Mohan Bhagwat
  • Navbharat Editorial
  • RSS

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