Navbharat Nishanebaaz: मायावती निर्णय लेने को आजाद, नहीं चलाएंगी भाई-भतीजावाद

Mayawati Family Politics: निशानेबाज ने मायावती के परिवारवाद विरोधी रुख और भतीजे आकाश-ईशान को राजनीतिक पद न देने के फैसले पर तंज कसा है। मायावती ने कांशीराम की नीति पर चलने की बात कही है।
Mayawati Akash Ishan Anand
निशानेबाजफोटो सोर्स- नवभारत डिजाइन
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Mayawati Akash Ishan Anand: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज बसपा प्रमुख मायावती की माया को समझना प आसान नहीं है। कभी वह अपने भतीजे आकाश को पार्टी में जिम्मेदारी देती हैं तो कभी एक झटके से बाहर का रास्ता दिखा देती हैं। अब उन्होंने तय किया है कि बसपा में अपने भतीजों यानी भाई आनंद कुमार के बेटों आकाश और ईशान को कोई राजनीतिक पद नहीं देगी। मायावती ने यह भी कहा कि वह अपने गुरु कांशीराम के समान परिवारवाद के खिलाफ हैं। उन्होंने अपने भाई-बहनों व रिश्तेदारों को विधायक, सांसद या मंत्री नहीं बनाया। भविष्य में भी जब उनकी सरकार बनेगी तो वह इसी नीति पर चलेंगी।

हमने कहा, 'मायावती चिरकुंवारी हैं। उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी चुन लेना चाहिए। उन्हें अपने भतीजों से इतनी नाराजगी क्यों है?'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, यह बुआ-भतीजों का आपसी मामला है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी तो एक समय मायावती को बुआ कहा था। ऐसा ही चाचा-भतीजे का भी रिश्ता है। अखिलेश की अपने चाचा शिवपाल यादव से नहीं पटती। बंगाल में ममता बनर्जी भी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी से परेशान हैं। भतीजा जब पार्टी पर कब्जे की प्लानिंग करता है और मनमानी व भ्रष्टाचार करने लगता है, तो पार्टी बदनाम होने लगती है। नेता पर भाई-भतीजावाद, परिवारवाद या नेपोटिज्म चलाने का आरोप लगता है।

Mayawati Akash Ishan Anand
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हमने कहा, 'पहले भी चाचा-भतीजे की आपस में नहीं पटी थी। धृतराष्ट्र ने अपने भाई पांडु के बेटों युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव को वनवास में भेजा था। धृतराष्ट्र के कौरव वंश ने पांडवों से पक्षपात और घोर अन्याय किया था। इसीलिए महाभारत का भीषण युध्द हुआ। धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र दुर्योधन के अंधमोह में अपने भतीजे पांडवों के साथ नाइंसाफी की थी। जहां तक मायावती ने भतीजे को दूर करने की ठानी है, वह यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए उठाया गया कदम है। वह दिखाना चाहती हैं कि वह परिवारवादी नहीं हैं।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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