Explainer: अखिलेश का सीक्रेट प्लान? चाचा शिवपाल को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, BJP के साथ तैयार की औवेसी की भी काट

UP Assembly Election 2027: यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा मुस्लिम वोटरों को साधने में जुटी है। शिवपाल यादव के आजम खान से रिश्ते सुधारने की कोशिश पार्टी के लिए अहम मानी जा रही है।
Samajwadi Party PAD And Muslim Vote Strategy
मुस्लिम वोटरों को अपनी तरफ करने के लिए अखिलेश यादव ने बनाई खास योजना (AI जनरेटेड इमेज)
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Samajwadi Party PAD And Muslim Vote Strategy: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अब सिर्फ नौ महीने बाकी हैं। कहने के लिए तो नौ महीने एक लंबा समय होता है, लेकिन अगर बात देश के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य में चुनाव की हो, तो यह समय भी कम लगता है। यही कारण है कि पक्ष हो या विपक्ष, सभी ने अभी से अपनी सियासी चालें चलना शुरू कर दी हैं। फिर चाहे वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान करना हो या फिर प्रदेश के तमाम जिलों में करोड़ों रुपये के विकास परियोजनाओं का लोकार्पण करना। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां मतदाताओं को साधने के लिए सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों को अपनी उपलब्धियों के तौर पर पेश कर रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पीडीए फॉर्मूले के तहत (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ गैर-यादव ओबीसी और सवर्ण जातियों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने में जुटे हैं। वहीं अखिलेश की नजर मुस्लिम वोटरों पर भी है, जो पिछले कुछ समय सपा से रूठे न सही, लेकिन दूर जरूर नजर आए हैं। सपा सुप्रीम विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में करना चाहते है और उन्होंने इसका जिम्मा अपने चाचा शिवपाल यादव को सौंपा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चाचा-भतीजे की यह जोड़ी मुस्लिम वोटरों को अपने पक्ष में कर पाएगी? सपा को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है? और वह कौन-सा तुरुप का इक्का है, जो सपा की राह आसान कर सकता है? 

मुस्लिम बहुल इलाकों के दौरे पर शिवपाल

शिवपाल यादव ने हाल ही में प्रदेश के मुस्लिम बहुल इलाकों का दौरा किया था। इस दौरान वो संभल, मुरादाबाद और रामपुर गए थे। यहां उन्होंने स्थानीय नेताओं से मिलकर जमीनी हकीकत की टोह ली, इसके साथ ही शिवपाल ने मुस्लिम वोटरों और पार्टी के बीच मनमुटाव को भी खत्म करने की कोशिश की। शिवपाल अपने इस दौरे के दौरान रामपुर जिला जेल में बंद सपा नेता आजम खान से भी मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं की इस मुलाकात को यूपी विधानसभा चुनाव के नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात को चुनावी तैयारियों के साथ आजम खान को मनाने की कवायद के तौर पर अधिक देखा जा रहा है। 

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आजम खान से मिलने रामपुर जिला जेल पहुंचे थे शिवपाल यादव (सोर्स- सोशल मीडिया)

माना जा रहा है कि आजम खान लंबे समय से सपा प्रमुख अखिलेश यादव के रुख से नाराज चल रहे हैं। उनकी नाराजगी की सबसे बड़ी वजह पार्टी में मोहिबुल्लाह नदवी के बढ़ते राजनीतिक कद को माना जा रहा है। नदवी रामपुर लोकसभा सीट से सांसद हैं और आजम खान के जेल जाने के बाद से इलाके में उनका कद तेजी से बढ़ा है। आजम इस बात से नाखुश हैं। शिवपाल आजम की इसी नाराजगी को दूर करने और उन्हें भरोसा दिलाने गए थे कि पार्टी और अखिलेश यादव उनके साथ हैं। 

आजम परिवार को साधने की कोशिश

शिवपाल जब रामपुर जिला जेल में आजम खान से मिलकर बाहर आए, तो बाहर आते ही उन्होंने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जेल में इतने बड़े नेता को जमीन पर लिटाया जा रहा है। उन्हें दवाई नहीं दी जा रही है और न ही कपड़े दिए जा रहे हैं। शिवपाल यादव ने कहा कि प्रदेश में सपा की सरकार बनते ही आजम खान पर किए गए एक-एक जुल्म और अत्याचार का बदला लिया जाएगा। शिवपाल ने यह बयान देकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को संदेश देने की कोशिश की कि समाजवादी पार्टी हर स्थिति में उनके साथ है।

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लंबे समय से जेल में बंद है आजम खान(सोर्स- सोशल मीडिया)

इसके बाद शिवपाल यादव ने रामपुर में मुस्लिम नेताओं, मौलानाओं और कार्यकर्ताओं से सीधी मुलाकात भी की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार बनते ही आजम खान के खिलाफ तमाम मामलों को वापस ले लिया जाएगा। 

आजम खान को गृह मंत्री बनाने का वादा

शिवपाल यादव ने अपने संभल, मुरादाबाद और रामपुर दौरे के दौरान कई अहम बैठकें की। इस दौरान वह न केवल स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिले, बल्कि रामपुर में उन्होंने आजम खान के मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और छात्रों से भी मुलाकात की। जहां उन्होंने एक बड़ा वादा भी कर दिया। 

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शिवपाल ने किया आजम खान को गृह मंत्री बनाने का वादा (सोर्स- सोशल मीडिया)

शिवपाल ने कहा कि 2027 में चुनाव जीतने के बाद अखिलेश सीएम बनेंगे और आजम खान को गृह मंत्री बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जेल में आजम खान के साथ बहुत बुरा सलूक हो रहा है। इसलिए इस बार भाजपा को हराना है और सपा की सरकार बनाना है।  

सपा के लिए आजम को मनाना क्यों जरूरी है? 

आजम खान समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम नेता हैं। हालांकि सपा ने पिछले कुछ सालों में उनके जेल मे रहने के दैरान बाद इकरा हसन, मोहिबुल्लाह नदवी और जियाउर्रहमान बर्क जैसे नए चेहरों का आगे बढ़ाने का काम किया है। लेकिन इसके बाद भी आजम खान यूपी में सपा के लिए सबसे बड़े नेता के तौर पर तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह आजम खान का लंबे समय तक सपा सरकार में रहने का अनुभव है।

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आजम खान सपा के सबसे बड़े मुस्लिम नेता में से एक (सोर्स- सोशल मीडिया)

इसके अलावा मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार आजम खान को निशाना बनाते हुए कार्रवाई कर रही है। ऐसे में उनके पास मुस्लिम वोटरों की सहानुभूति भी है। ताजा SIR के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 19 से 20 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। ऐसे में सपा इतने बड़े वोट बैंक को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती है। आजम खान मुस्लिम वोटरों को सपा के पक्ष में करने का काम कर सकते हैं। यही वजह है कि सपा आजम को मनाकर किसी भी हाल में अपने साथ बनाए रखना चाहती है। 

दोतरफा रणनीति पर काम कर रही है सपा

राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, सपा 2027 विधानसभा चुनाव के लिए दोतरफा रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत जहां अखिलेश यादव इन दिनों लगातार धार्मिक आयोजनों शामिल  हो रहे हैं, मंदिरों में दर्शन करना और समावेशी बयान देकर भाजपा के लिए हिंदू कार्ड की काट ढूंढ रहे हैं। वहीं, शिवपाल मुस्लिम नेताओं से मिलकर भरोसा दिलाने का प्रयास कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी अभी भी उनके साथ है। इस काम में शिवपाल का जमीनी अनुभव, उनका पुराना नेटवर्क और मुस्लिम नेताओं से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव इस काम के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

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दो तरफा रणनीति पर काम कर रहे हैं अखिलेश यादव (सोर्स- सोशल मीडिया)

सपा के समाने चुनौतीयां? 

मुस्लिम मतदाताओं को लेकर यूपी में सबसे बड़ी चुनौती असदुद्दीन ओवैसी और उनकी AIMIM पार्टी बन सकती है। असदुद्दीन ओवैसी ने पिछले कुछ महीनोंं में बस्ती, बहराइच और गाजीपुर जैसे जिलों में जनसभाएं की हैं। संभल और रामपुर की तरह इन जिलों में भी मुस्लिम आबादी अधिक संख्या में रहती है। ओवैसी अपनी जनसभाओं में प्रदेश की योगी सरकार पर तो हमला करते ही हैं साथ ही वो अखिलेश यादव और सपा पर भी हमलावर रहे हैं। 

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ओवैसी कई बार अपनी सभाओं से सपा पर आरोप लगाते हैं कि सत्ता में बने रहने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन उनके विकास और अधिकारों के लिए काम करने की बात आते ही गायब हो जाते हैं। AIMIM प्रदेश में इससे पहले दो विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है। हालांकि अभी तक यूपी में उनका खाता नहीं खुल पाया है। लेकिन सपा ओवैसी को हल्के में लेने की गलती नहीं करेगा। क्योंकि ओवैसी की पहचान के देश के सबसे बड़ा मुस्लिम नेता के तौर पर है।

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