

Who Was Manu in Manusmriti: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हम जानना चाहते हैं कि मनु कौन था और बार-बार मनुस्मृति क्यों जलाई जाती है? हमें स्मृति ईरानी के बारे में तो मालूम है, लेकिन मनुस्मृति के बारे में कुछ भी नहीं पता! स्मृति माने याददाश्त या मेमोरी! किसी की स्मृति अच्छी रहती है तो कुछ लोग भुलक्कड़ रहते हैं। जब किसी की स्मृति पूरी तरह जवाब दे जाती है तो डॉक्टर कहते हैं कि उसे स्मृतिभ्रंश हो गया। फिलहाल आप हमें मनु के बारे में बताइए जिसकी स्मृति को बार-बार जलाया जाता है।'
हमने कहा, 'पहले तो लोगों को यही नहीं पता कि वह किस मनु की स्मृति जला रहे हैं क्योंकि मनु अनेक हुए हैं जैसे कि वैवस्वत मनु, अंगिरा मनु, सावर्णी मनु वगैरह। महान साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की अमर रचना का नाम है 'कामायनी' जिसे हिंदी में एमए करने वाले छात्र पढ़ते हैं। उसमें मनु और इला का उल्लेख है। मनु का अर्थ है प्रथम मानव जिससे सृष्टि उत्पन्न हुई। बाइबिल में प्रथम युगल को एडम एंड ईव तथा इस्लाम में आदम और हौवा कहा गया है। मनु ब्रम्हा के पुत्र थे।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, आपके पास इतनी जानकारी है तो आप पक्के मनुवादी हैं। आपकी बातें हमें कन्फ्यूज कर रही हैं फिर भी कुछ और जानकारी दीजिए,'
हमने कहा, 'मनु की कथा भगवान विष्णु के मत्स्यावतार जुड़ी है। राजा मनु को नदी में स्नान करते समय एक मछली मिली। उन्होंने उसे एक सरोवर में डाल दिया। मछली का आकार बहुत से तेजी से बढ़ गया तो फिर उसे समुद्र में डलवा दिया। मछली ने मनु से कहा कि प्रलय आने वाला है। सृष्टि जल में डूब जाएगी। ऐसे समय मैं तुम्हें बचाऊंगी। मनु ने सृष्टि के सारे प्राणी अपने साथ लिए और एक बहुत बड़ी नौका में सवार हो गए। वह मछली उस नौका को खींचकर हिमालय पर्वत की ऊंचाई पर ले गई और सबकी प्राणरक्षा हो गई। मनु और उनकी पत्नी शतरूपा ने घनघोर तपस्या की और भगवान विष्णु से वरदान मांगा कि वह उनके यहां पुत्र रूप में जन्म लें। अगले जन्म में मनु और शतरूपा राजा दशरथ और कौशल्या बने। उनके यहां भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया। मनु के नाम पर कालगणना होती है। हर मन्वंतर में एक मनु होता है। एक मन्वंतर 30 करोड़ वर्ष से भी ज्यादा का होता है। उसमें 71 चतुर्युग (सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग) होते हैं।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, किसी भी मनुस्मृति जलाने वाले को यह सारी बातें मालूम नहीं हैं। यह नहीं मिलती तो लोग इसके नाम पर कोई पुरानी किताब या रेलवे टाइमटेबल जला डालते हैं।