

Mahavitran Smart Meter Installation Controversy: उपभोक्ताओं को विश्वास में लेने की खोखली घोषणा करते हुए महावितरण ने सख्ती से स्मार्ट मीटर लगाना शुरू कर दिया, जिससे राज्य भर के विद्युत ग्राहकों में असंतोष व्याप्त हो गया है। वाट्सएप संदेश में कहा गया कि आगामी 48 घंटों के बाद कभी भी विद्युत मीटर बदला जा सकता है। इस वजह से पुणे-ठाणे व अन्य शहरों में व ग्रामीण क्षेत्रों में आंदोलन शुरू हो गया। सरकार का दावा है कि ग्राहकों को विद्युत उपयोग की अचूक जानकारी मिले, इस उद्देश्य से स्मार्ट मीटर लगाया जा रहा है। केंद्र की सुधारित वितरण क्षेत्र योजना के तहत देशभर में 25 करोड़ ग्राहकों के यहां ऐसे मीटर लगाए जा रहे हैं।
महावितरण का दावा है कि स्मार्ट मीटर की प्रक्रिया में मानव हस्तक्षेप दूर होगा। मोबाइल द्वारा ग्राहकों को विद्युत के उपयोग का व्यवस्थापन संभव होगा। इसी तरह बिजली सेवा और बिलों के बारे में शिकायत का निराकरण आसान होगा। यह मीटर लगाने पर दिनभर में इस्तेमाल होने वाली बिजली पर प्रति यूनिट 80 पैसे की छूट दी जाएगी। दूसरी ओर लोगों की शिकायत है कि स्मार्ट मीटर लगवाने पर बिजली बिल में भारी वृद्धि हो जाती है। बढ़े हुए बिल और उस पर लगाए जाने वाले जुर्माने से हजारों ग्राहक परेशान हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानमंडल में आश्वासन दिया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की सख्ती नहीं की जाएगी, लेकिन अब यह मीटर लगाए जा रहे हैं। यह शंका है कि महाराष्ट्र में अदाणी समूह व बड़ी कंपनियों को ऐसा मीटर लगाने का ठेका दिया गया है।
ग्राहकों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि स्मार्ट मीटर कभी भी प्रीपेड में बदल सकता है, जिसकी वजह से एडवांस में पैसा भरना पड़ेगा। बिजली बिल की रकम में वृद्धि होगी। रिचार्ज खत्म हो जाने पर विद्युत पूर्ति खंडित हो सकती है। आर्थिक दृष्टि से कमजोर परिवारों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। ग्राहक संगठनों की राय है कि कौन सा मीटर लगवाना है, यह ग्राहक का अधिकार है। स्मार्ट मीटर को लेकर कुछ मामले अदालत के विचाराधीन होने पर भी 48 घंटे के बाद मीटर बदलने का संदेश भेजना उचित नहीं है। बार-बार शिकायतें आती रही हैं कि स्मार्ट मीटर की वजह से बिल ज्यादा रकम का आता है।
ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रसिटी एम्प्लाईज व नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रीसिटी एम्पलाईज एंड इंजनियर्स जैसे संगठनों ने दावा किया है कि स्मार्ट मीटर लगाना विद्युत क्षेत्र को निजीकरण की ओर ले जाने वाली प्रक्रिया है। इसका रोजगार पर विपरीत असर होगा। स्मार्ट मीटर का मामला केवल तकनीकी नहीं है। यह ग्राहकों के विश्वास, सम्मति, पारदर्शकता से जुड़ा है। ग्राहक संगठन, कर्मचारी संगठन के आंदोलन की वजह से यह विवाद बढ़ सकता है। स्मार्ट मीटर के लिए जनता को विश्वास में लेना उचित रहेगा।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा