निशानेबाज (डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी पुस्तक ‘50 गोल्डन रूल्स ऑफ लाइफ’ के विमोचन के अवसर पर बहुत सही बात कही कि राजनीति असंतुष्ट आत्माओं का समुद्र है। इसमें सभी लोग दुखी हैं। जो पार्षद बनता है वह इस बात के लिए दुखी होता है कि उसे विधायक बनने का मौका नहीं मिला। विधायक इसलिए दुखी रहता है कि उसे मंत्री पद नहीं मिला। मंत्री दुखी होता है कि उसे मुख्यमंत्री बनने को नहीं मिला और मुख्यमंत्री इस तनाव में रहता है कि न जाने कब हाईकमांड उसे पद छोड़ने के लिए कह दे। राजनीति में हर व्यक्ति महत्वाकांक्षी और दुखी है।’’
हमने कहा, ‘‘जो बात नितिन ने कही, वही नानक ने भी सदियों पहले कही थी- नानक दुखिया सब संसार! भगवान बुद्ध ने भी कहा था कि इच्छा सभी दुखों का मूल है। इच्छा पूरी नहीं हुई तो व्यक्ति दुखी हो जाता है। धैर्यवान लोग असफलता को सफलता की पहली सीढ़ी मानते है और आगे के लिए प्रयास जारी रखते हैं। आपने कहावत सुनी होगी- करत-करत अभ्यास के जड़मति हो सुजान, रस्सी आवत-जात के सिल पर पड़त निशान! इसका अर्थ है कि निरंतर अभ्यास या प्रयास जारी रखकर बुद्धू इंसान भी चतुर-सुजान बन जाता है। कुएं से पानी खींचते समय रस्सी की रगड़ मुंडेर के पत्थर पर पड़ती है तो वह भी घिस जाता है।’’
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पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, गडकरी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की आत्मकथा का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति हार जाता है तो वह खत्म नहीं होता। जब वह उस काम को छोड़ देता है तो वह खत्म हो जाता है।’’
हमने कहा, ‘‘यह बात महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार पर लागू होती है जो इस उम्र में भी अपनी राजनीति जारी रखे हुए हैं। बीजेपी ने अपने बुजुर्ग नेताओं को मार्गदर्शक मंडल रूपी वृद्धाश्रम में डाल कर उनकी राजनीति खत्म कर दी। जहां तक असंतुष्ट आत्माओं की बात है, उनमें कुछ भटकती आत्माएं भी हैं जिनकी वजह से महाराष्ट्र की नई सरकार बनने में लगातार विलंब हो रहा है। ऐसे लोग अपनी अभिलाषा पूर्ण नहीं होने की वजह से दुखी रहते हैं। सिर्फ इच्छा रखने से कुछ नहीं होता। इसके साथ रणनीति और प्रयास भी होने चाहिए। इसके बाद प्रारब्ध ही सर्वोपरि होता है। आपने सुना होगा- किस्मत मेहरबान तो गधा पहलवान!’’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा