नवभारत संपादकीय: AIADMK गठबंधन पर मतभेद, अन्नामलाई व BJP की राहें हुईं जुदा
k. Annamalai Resigns BJP Exit: के. अन्नामलाई के बीजेपी छोड़ने से तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। एआईएडीएमके गठबंधन पर मतभेद के बीच उन्होंने नई राजनीतिक राह चुनने का संकेत दिया।
- Written By: अंकिता पटेल
अन्नामलाई, तमिलनाडु बीजेपी, इस्तीफा,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Tamil Nadu BJP Leadership: तमिलनाडु में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के पद से के। अन्नामलाई के इस्तीफा देने के साथ ही पार्टी वहां अपना चेहरा खो बैठी है। दिसंबर 2025 में भी अन्नामलाई ने संकेत दिया था कि उनके विचार बीजेपी के प्रमुख नेताओं से मेल नहीं खाते, लेकिन उनसे कहा गया था कि विधानसभा चुनाव होने तक वह अपने पद पर बने रहें। आईपीएस अधिकारी पद छोड़कर अन्नामलाई बीजेपी में शामिल हुए थे। उन्होंने अपने बेधड़क स्वभाव व परिश्रम से पिछले 3 वर्षों के दौरान तमिलनाडु बीजेपी में नई जान फूंकी थी।
तकनीक के प्रति उनका गहरा रुझान था। अन्नामलाई के प्रयासों की वजह से ही 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने तमिलनाडु में 11 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। जब बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए एआईएडीएमके के साथ गठबंधन का पैसला किया, तो अन्नामलाई ने अपना विरोध जाहिर किया। क्योंकि वह बीजेपी को प्रमुख विपक्षी दल के रूप में विकसित करने में लगे थे।
अन्नामलाई ने बीजेपी से इस्तीफा देते हुए कहा कि उनके मन में कोई नाराजगी या असंतोष नहीं है। वह एक अलग पार्टी बनाने जा रहे हैं और भविष्य में कभी बीजेपी को उनके सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी, तो वह उसके लिए तैयार रहेंगे।
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अन्नामलाई के इस्तीफे से तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत
अन्नामलाई ने कहा कि वह दक्षिण-मध्य रुझान वाली तमिल राष्ट्रवादी पार्टी बनाएंगे, जो भ्रष्टाचार का डटकर विरोध करेगी तथा डीएमके व सत्तारूढ़ टीवीके से भी स्पर्धा करेगी। अन्नामलाई के साथ उनके तमाम सहयोगियों ने भी बीजेपी से इस्तीफा दे दिया। उन्हें समझाने का बहुत प्रयास किया गया।
लेकिन उन्होंने कहा कि एआईएडीएमके से गठबंधन उन्हें सख्त नापसंद है और वह बीजेपी से मधुर संबंध रखते हुए पार्टी छोड़ रहे हैं। आरएसएस के विचारक एस। गुरुमूर्ति की राय में अन्नामलाई का इस्तीफा सिर्फ अल्पविराम है, पूर्णविराम नहीं! वह अपनी लोकप्रियता के बल पर अलग जनाधार बनाना चाहते हैं। उनकी इच्छा एक नई प्रतिस्पर्धी पार्टी बनाने की है जिसे लेकर वह काफी गंभीर हैं।
अन्नामलाई के जाने से बीजेपी को झटका, स्वतंत्र विस्तार की रणनीति पर जोर
उनके इस्तीफे से बीजेपी एक जोशीले संगठनकर्ता को खो बैठी है। समय बताएगा कि क्या अन्नामलाई तमिलनाडु में तीसरी शक्ति के रूप में उभर सकते हैं। वह बीजेपी नेतृत्व की इस रणनीति से सहमत नहीं थे कि राज्य के किसी क्षेत्रीय दल में फूट डालो और उसे कमजोर कर अपनी ताकत बढ़ाओ।
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अन्नामलाई का दावा था कि जयललिता के निधन के बाद से एआईएडीएमके पहले ही काफी कमजोर हो चुकी है। उनके साथ गठबंधन करने से बीजेपी भी कमजोर हो जाएगी। इसलिए राज्य में बीजेपी को अपने दम पर मजबूती हासिल करनी चाहिए, कुछ वर्षों के जमीनी स्तर पर प्रयासों से बीजेपी का आधार तमिलनाडु में सुदृढ़ हो सकता है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
