नवभारत विशेष: व्यापार समझौते से विकास की नई शुरुआत, आज भारत विश्वसनीयता की स्थिति के साथ करता है वार्ता

India New Zealand FTA: भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से किसानों, युवाओं और उद्योगों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। यह समझौता वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।
Navbharat Special: A New Dawn of Development Through Trade Agreements—Today, India Negotiates from a Position of Credibility.
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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India New Zealand Trade Deal: भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) विकसित दुनिया के साथ को सहभागिता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को किसानों, महिलाओं, युवाओं और रोजगार सृजक उद्योगों के लिए ठोस लाभ में बदलने से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण में हुई निर्णायक प्रगति को प्रतिबिंबित करता है।

यह एफटीए प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं, जिसमें यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ शामिल हैं, के साथ हुए कई ऐतिहासिक व्यापार समझौतों के बाद हो रहा है। ये समझौते वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति को मजबूत करते हैं और निर्यातकों को दुनिया की कुछ सबसे लाभकारी अर्थव्यवस्थाओं में, यहां तक कि वर्तमान वैश्विक अनिश्चितता और उथल-पुथल के बीच भी प्रतिस्पर्धा आधारित बढ़त प्रदान करते हैं।

निर्यात और रोजगार को मजबूत बढ़ावा

दोनों पक्षों के लिए समान रूप से लाभकारी इस समझौते के केंद्र में न्यूजीलैंड की यह प्रतिबद्धता है कि वह तुरंत ही सभी भारतीय उत्पादों पर शुल्क समाप्त कर देगा, जिससे उस बाजार में एक महत्वपूर्ण बाधा दूर होगी, जहां हमारे प्रमुख निर्यात पर वर्तमान में 10% शुल्क लगाया जाता है। यह वत्र, कालीन, धागे, कपड़े, फुटवियर, बैग, बेल्ट, वाहन घटक, मशीनरी, उपकरण, रत्न और आभूषण तथा हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है।

रोजगार के अवसरों का सृजन करने वाले ये उद्योग भारत के एमएसएमई इकोसिस्टम की रीढ़ हैं और इन्हें मूल्य प्रतिस्पर्धा और बाजार पहुंच

लाभ मिलेगा। इससे निर्यात बढ़ेगा और निर्माण केन्द्रों, कारीगर समुदायों और लघु उद्यमों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। यह समझौता उस व्यापक दर्शन को प्रतिबिंबित करता है, जो 2014 में मोदी सरकार के गठन के बाद से भारत की व्यापार नीति का मार्गदर्शन कर रहा है।

यह समावेश, सशक्तिकरण और साइय समृद्धि में निहित है। व्यापार को राष्ट्रीय परिवर्तन के उपकरण के रूप में देखा जाता है, जो किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं और वंचित समुदायों कोलाभ पहुंचाता है। नारी शक्ति इस समझौते की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह भारत का पहला महिला नेतृत्व वाला एफटीए है। इसके साथ ही भारत ने अपने प्रमुख कृषि हितों की मजबूती से सुरक्षा की है।

डेयरी उत्पादों (जैसे दूध, क्रीम, दही और पनीर); प्याज, चना, मटर, मकई, बादाम, चीनी और कुछ खास तेल और वसा जैसी संवेदनशील वस्तुओं को शुल्क छूट से बाहर रखा गया है। समझौता सुनिश्चित करता है कि घरेलू किसान हानिकारक आयात प्रतिस्पर्धा से सुरक्षित रहें।

किसानों और मछुआरों के हितों की रक्षा करना सभी व्यापार वार्ताओं में भारत के दृष्टिकोण का केंद्र रहा है। युवा और पेशेवर समझौते का एक प्रमुख स्तंभ छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए बढ़ी हुई आवागमन की सुविधा है, जो भारत के युवाओं के लिए नए वैश्विक मार्ग का निर्माण करती है।

आज भारत विश्वसनीयता की स्थिति के साथ करता है वार्ता

आज भारत यकत और विश्वसनीयता की स्थिति के साथ वार्ता करता है। पहले के दशकों में व्यापार समझौतों को अक्सर संवेदनशील क्षेत्री को अपर्याप्त सुरक्षा दिए बिना अंतिम रूप दिया जाता था। इसके विपरीत वर्तमान वार्ताए सुनिश्चित करती है कि कृषि, डेयरी और अन्य संवेदनशील क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित रहे।

जैसे-जैसे भारत विकसित अर्थाद्यवस्थाओं के साथ अपनी सहभागिता को प्रगाढ़ कर रहा है। विकसित दुनिया के साथ हुए व्यापार सम्झौते इस तथ्य का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं कि व्यापार नीति को कैसे राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के साथ संरेखित किया जा सकता है, जिससे विवासित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में समावेशी वृद्धि और दीधविधि आर्थिक सुदृढ़ता सुनिश्चित होती है।

लेख- केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री, पीयूष गोयल के द्वारा

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