

त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग के बीच विमानन कंपनियों ने हवाई किराए में बढ़ोतरी की।
इंडिगो, एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और आकासा ने ईंधन सरचार्ज बढ़ाया।
घरेलू उड़ानों पर ईंधन अधिभार 375 से 1,300 रुपये तक पहुंचा, जबकि अंतरराष्ट्रीय रूटों पर भी 1,000 से 10,000 रुपये तक बढ़ोतरी दर्ज हुई।
हवाई यात्रा को आम जरूरत बताते हुए किराए को किफायती और स्थिर रखने की मांग उठाई गई।
Rising Airfares During Festive Season: देश में हवाई जहाज का किराया अपने उफान पर है। अभी त्योहारी सीजन में आवागमन के लिए हवाई परिवहन की मांग ज्यादा हो जाती है। इन परिस्थितियों में विमानन कंपनियों ने हवाई टिकट की मांग और आपूर्ति के बीच व्याप्त असंतुलन का बेजा फायदा उठाने का प्रयास किया है।
किराए में पहले बढ़ोतरी इंडिगो एयरलाइंस ने की इसके बाद एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और आकासा द्वारा अपने किरायों में बढ़ोतरी की घोषणा की गई, बढ़ोतरी को ईंधन सरचार्ज के रूप में दर्शाया गया है। अभी एटीएफ की कीमतें 121 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 137 रुपये हो गई है। पहले से लगे ईंधन अधिभार जो न्यूनतम 275 और अधिकतम 950 रुपये था, उसमें क्रमशः 100 रुपये से 350 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो गई है, अब कुल अधिभार 375 से 1300 रुपये के बीच हो गया है।
घरेलू रूटों के अलावा अंतरराष्ट्रीय रूटों पर भी किराए में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिसके अंतर्गत पश्चिमी एशिया रूट पर न्यूनतम 55 अमेरिकी डॉलर, यूरोपीय रूट पर 135, उत्तरी अमेरिकी रूट पर 215 और ऑस्ट्रेलियाई रूट पर 210 डॉलर की बढ़ोतरी की गई है।
कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय रूट पर\ न्यूनतम 1 हजार से 10 हजार रुपये की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश में विमान किराए को दीर्घकालीन तौर पर क्या एक नियत दर पर स्थिर नहीं रखा जा सकता? विमान यात्रा अब कोई विलासिता न होकर पेशेवर जीवन की एक सामान्य जरूरत बन गई है, तो वह लोगों के लिए किफायती होनी चाहिए।
ईंधन किराए में बढ़ोतरी के इतर हवाई अड्डों पर एयरपोर्ट हैंडलिंग चार्ज की वजह से भी विमान किराए बढ़ाए जाते हैं। इसे लेकर सरकारी उपक्रम एयरपोर्ट अथॉरिटी पर भी आरोप लगे हैं। दूसरा एटीसी यानी एयर ट्रैफिक कंट्रोल जो पूरे तौर पर सरकार के नियंत्रण में होता है, उसका भी शुल्क होता है। कुल मिलाकर ये सभी शुल्क विमान किराए में शामिल किए जाते हैं।
विमान सेवाओं में फ्लेक्सी किराया प्रणाली अपनाए जाने की वजह से ऐन वक्त या आपातकाल में यात्रियों को ज्यादा किराया वहन करना पड़ता है। कई निजी कंपनियां भी घाटे और विवाद की वजह से बंद हुई हैं, जिनमें जेट, सहारा, किंगफिशर, गो एयर शामिल हैं। अभी देश में इंडिगो, स्पाइस, एयर इंडिया समूह विमान सेवा संचालन क्षेत्र में मौजूद हैं, जिनमें अकेले इंडिगो की हिस्सेदारी 60 फीसदी से ज्यादा है। देश में हवाई अड्डों का निर्माण तेजी से बढ़ा है। देश में अभी 165 हवाई अड्डे इस्तेमाल में हैं, जिनमें 32 हवाई अड्डे अंतरराष्ट्रीय हैं, करीब 30 हवाई अड्डे राज्य सरकारों और निजी कंपनियों के स्वामित्व में हैं।
देश के बड़े हवाई अड्डे जिसमें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चंडीगढ़, कन्नूर, नागपुर शामिल हैं, इनमें निजी क्षेत्र का स्वामित्व है। साथ ही सार्वजानिक उपक्रम भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण एएआई की हिस्सेदारी इनमें पहले 4 में महज क्रमशः 26, 26, 13 13 प्रतिशत है। चंडीगढ़ हवाई अड्डे में पंजाब सरकार के साथ मिलाकर एएआई की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत, नागपुर में 49 और कन्नूर में महज 7.47 प्रतिशत है यानी नागरिक विमान सेवा का बड़ा सिग्मेंट पूरे तौर पर निजी हाथों में है।
जबकि मध्यम और छोटे हवाई अड्डों का संचालन सरकारी कंपनी एएआई के पास है, परंतु देश के बड़े हवाई अड्डे निजी स्वामित्व में हैं। देश के अधिकतर नागरिकों को विमान सेवाओं से यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और देश के दूरदराज क्षेत्रों में नागरिक विमान सेवा का विस्तार भी हो रहा है। देश को विकसित राष्ट्र बनाने में नागरिक उड्डयन की भूमिका को और विस्तृत करने की बात की जा रही है। ऐसे में देश में एक ऐसा नियामक प्राधिकरण, जो यात्री विमान किराए को औचित्यपरक और तार्किक बढ़ोतरी के अनुरूप रखे, बेहद जरूरी हो जाता है। जिनमें हवाई अड्डों की स्थापना, रखरखाव, देखरेख, विमान ट्रैफिक नियंत्रण और विमान ईंधन एटीएफ इन सभी पहलू की देखरेख इस नियामक प्राधिकरण के जिम्मे दी जाएंगी तो इस उद्योग से इसके उपभोक्ताओं का एक बेहतर संबंध विकसित होगा।
अभी देश में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या दुनिया में तीसरे नंबर पर है। कोरोना महामारी के पहले देश में 14.4 करोड़ लोगों ने विमान यात्राएं की जो रिकार्ड 2023 में 15.2 करोड़ यात्री के साथ टूटा। पर अभी अगस्त महीने में हवाई यात्रियों की संख्या में गिरावट दर्ज हुई है। जाहिर है हवाई यात्रियों के लिए हवाई किराए किफायती नहीं रह पा रहे हैं। नियामक प्राधिकरण की स्थापना हवाई यात्रियों के लिए एक न्यायसंगत माहौल उत्पन्न करेगी।
लेख-मनोहर मनोज के द्वारा