नवभारत संपादकीय: विदेश जाने की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, युवाओं के लिए सबक

Illegal Immigration Risks: विदेश में नौकरी के लालच में अवैध रास्तों से जाने वाले युवाओं को धोखाधड़ी, शोषण और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। लेख में ऐसे जोखिमों पर चिंता जताई गई है।
Navbharat Editorial: Haste to go abroad could prove costly a lesson for the youth.
अवैध प्रवास, डंकी रूट, विदेश नौकरी, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Overseas Job Scam Risks: कहावत है- दूर के ढोल सुहावने। कितने ही महत्वाकांक्षी युवा सोचते हैं कि अपनी किस्मत संवारने और ज्यादा पैसे कमाने के लिए उन्हें विदेश जाकर नौकरी करनी चाहिए, इस चक्कर में वह अपना भारी नुकसान कर बैठते हैं या ऐसी मुसीबत में फंस जाते हैं जिससे बाहर निकल पाना टेढ़ी खीर होता है।

पंजाब के युवा कनाडा व अमेरिका जाने के लिए जमीन बेचकर लाखों रुपये दलालों को देते हैं जो उन्हें डंकी रूट से विदेश ले जाने का वादा करते हैं। ऐसे युवा पासपोर्ट-वीजा जैसे वैध दस्तावेज न होने से विदेश में पकड़ लिए जाते हैं। कुछ की खराब मौसम की वजह से या तबीयत बिगड़ने से रास्ते में ही मौत हो जाती है।

विदेश में ऊंची कमाई का सपना

अमेरिका से गत वर्ष ऐसे अवैध प्रवासियों को हथकड़ी-बेड़ी डालकर अपमानजनक स्थिति में सेना के विमान से भारत वापस भेजा गया था। खाड़ी देशों में भी युवा इसलिए जाते हैं क्योंकि वहां भारत की तुलना में 4 या 5 गुना वेतन मिलता है लेकिन वहां पहुंचने पर कंपनी का मालिक उनके पासपोर्ट छीन लेता है और बंधुआ मजदूरों के समान काम लेता है।

उन्हें शहर से दूर किसी डॉरमिटरी में रखा जाता है। न ठीक से खाना मिलता है, न सोने की सुविधा रहती है। भारी तकलीफ में रहकर भी उन्हें इस बात की तसल्ली रहती है कि वह घर पैसा भेज रहे हैं। कभी कंपनी का मालिक कारोबार छोड़कर भाग जाए तो इन अकुशल श्रमिकों को खाने के लाले पड़ जाते हैं। उन्हें आंदोलन करने का भी अधिकार नहीं होता। यदि भारतीय दूतावास ने उनकी गुहार सुनी तो उन्हें स्वदेश वापस भेजने का प्रबंध किया जाता है।

युवाओं को बनाया साइबर ठगी और मानव तस्करी का शिकार

रूस में एजेंट के मार्फत नौकरी के लिए गए युवाओं को फौज में जबरन भर्ती कर दिया गया और यूक्रेन से लड़ने भेजा गया जहां उनकी जान खतरे में पड़ गई। अब पता चला है कि थाईलैंड में बड़े वेतन की नौकरी का लालच देकर 800 भारतीयों को म्यांमार थाईलैंड सीमा के गोल्डन ट्रेंगल स्थित अज्ञात छावनी में बंधक बनाकर रखा गया। इनमें महाराष्ट्र के 25 युवकों का समावेश है।

इस अंतरराष्ट्रीय साइबर माफिया के चंगुल से इन युवाओं को छुड़ाने के लिए बोड पुलिस ने सीधे विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है। बीड जिले की केज तहसील के एक 24 वर्षीय युवक को फेसबुक विज्ञापन में 70,000 रुपये वेतन का प्रलोभन दिया गया। वह 4 जून को पुणे से बैंकाक पहुंचा। वहां से उसे जबरन म्यांमार के घने जंगल ले जाया गया।

उसका पासपोर्ट व दस्तावेज छीन लिए गए उसे कमरे में बंद कर ऑनलाइन धोखाधड़ी का काम करवाया गया। इनकार करने पर बुरी तरह मारा-पीटा गया व बिजली का शॉक दिया गया, यह अंतरराष्ट्रीय गिरोह ऑनलाइन ठगी व जालसाजी से लाखों डॉलर कमाता है। उस युवक ने किसी प्रकार अपनी पत्नी को फोन कर सूचना दी। तब इस मानव तस्करी का पता चला। इस तरह के मामलों से पता चलता है कि विदेश में नौकरी का लालच कितना महंगा पड़ता है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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