नवभारत विशेष: शादी से पहले विरोध क्यों नहीं? सिया और सोनम के खौफनाक कृत्य की वजह क्या ?

Sonam Raghuvanshi Siya Goyal Case: लेख में सोनम रघुवंशी और सिया गोयल मामलों के संदर्भ में परिवार, प्रेम संबंध और तयशुदा विवाह को लेकर उठे सवालों तथा सामाजिक पहलुओं पर चर्चा की गई है।
Navbharat Special: Why was there no opposition before the wedding? What was the reason behind the horrific acts committed by Siya and Sonam?
सोनम रघुवंशी, सिया गोयल, प्रेम विवाह,मामला (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Love Marriage Family Conflict: सोनम रघुवंशी और सिया गोयल के परिवार के लोगों के जो बयान सामने आए हैं, उन्हें जानकर कतई ऐसा नहीं लगता कि वो दकियानूसी थे या अपनी लड़कियों को आजादी नहीं देना चाहते थे। इसके बाद भी चाहे सोनम रघुवंशी हो या सिया गोयल, दोनों ने ही आखिर अपने-अपने प्रेमियों से शादी करने का एक आसान और बिल्कुल संभव रास्ता क्यों नहीं अपनाया? आखिर उन्होंने अपने मां-बाप से एक बार भी क्यों नहीं कहा कि वे उनके द्वारा तय की गई शादी से कतई खुश नहीं हैं और उन्होंने पहले से तय कर रखा है कि वह किसके साथ जीवन बिताएंगी?

कोई भी ऐसी वजह सामने नहीं आती कि आखिर उन्होंने अपने मन की शादी करने के लिए जो बिल्कुल सीधा और आसान रास्ता था, उसे क्यों नहीं चुना? सिया गोयल के माता-पिता कहते हैं कि अगर एक बार भी उन्हें इस बात का पता चल गया होता कि सिया इस शादी से खुश नहीं है, तो आखिर वह इतनी धूमधाम से शादी करने की योजना ही क्यों बनाते? सिया ने एक बार भी अपनी होने वाली शादी का विरोध नहीं किया था, बल्कि उल्टे उसकी सभी गतिविधियां कुछ ऐसा दर्शा रही थीं कि जैसे वह इस शादी से बहुत खुश हो।

मुस्कुराहट के पीछे छिपी चुप्पी: ‘ना’ न कह पाने की कीमत क्या हत्या बन गई?

खुद सिया की मम्मी इस बात को मीडिया से कहती हैं कि वह इतनी खुश थी कि यह खुशी बार-बार उसके चेहरे से झलकती थी। केतन के मां-बाप भी इसकी पुष्टि करते हैं। सोनम रघुवंशी के मामले में भी बिल्कुल ऐसा ही था। लेकिन 11 मई 2025 को सोनम और राजा रघुवंशी की इंदौर में शादी होती है।

20 मई 2025 को वे दोनों हनीमून के लिए मेघालय जाते हैं और चेरापूंजी के पास सोनम और उसके प्रेमी द्वारा राजा को गहरी खाई में धकेलकर मार दिया जाता है। ठीक इसी तरह फरवरी 2026 में सिया और केतन की सगाई होती है और नवंबर 2026 में शादी होना तय हो जाता है, जिसके इंतजाम में वह खुद बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है।

लेकिन 18 जून 2026 को अपने प्री-बर्थ डे सेलिब्रेशन के दौरान सिया द्वारा अपने प्रेमी के साथ मिलकर केतन अग्रवाल की लोहगढ़ के किले में धक्का देकर हत्या कर दी जाती है। आखिर जब शादी को लेकर विरोध नहीं था, उल्टे हर पल खुशी टपक रही थी, तो फिर ऐसे खौफनाक कांड को क्यों अंजाम दिया गया? क्या सिया और सोनम ने अपनी-अपनी शादियों का अपने मां-बाप

'अच्छी लड़की' बनने का दबाव कहीं छीन तो नहीं रहा 'ना' कहने का साहस?

से इसलिए विरोध नहीं किया, क्योंकि घर की वह बहुत अच्छी बच्चियां थीं, बहुत सभ्य और सुसंस्कृत मानी जानी वाली ? क्या उनके लिए एक 'न' कहना इतना बड़ा और मुश्किलभरा काम था कि अपने पिताओं से ही नहीं अपनी मांओं से भी कभी अपवाद के तौर पर एक बार भी नहीं कह सकीं कि वह इस शादी से खुश नहीं है, वो शादी नहीं करना चाहती ? क्या उनकी इस चुप्पी और कृत्य का नतीजा सामाजिक दबाव और अच्छी लड़की बने रहने की संस्कृति का नतीजा है? लगता तो यही है।

यदि रिश्ता स्वीकार नहीं था तो उससे बाहर निकलने के बहुत सरल रास्ते मौजूद थे। लेकिन एक बार भी इस दोनों ने इशारा तक नहीं किया। क्या इसकी वजह यह रही कि बचपन से ही इन दोनों को जो परवरिश मिली, उसमें 'न' कहने की हिम्मत ही नहीं विकसित की गई थी? सोचना पड़ेगा कि जो संपन्न लोग अपने बच्चों को किसी भी मामले में जरा भी कष्ट नहीं पहुंचने देते, वे कहीं उन पर ऐसा दबाव तो नहीं बना देते कि ऐसे बच्चे अपने मां-बाप का विरोध करने की बात तो दूर, उनसे अपने मन की कोई ऐसी बात भी नहीं कह सकते, जो उनके मां-बाप ने न सोची हो? बच्चों को न कहने की आदत भी सिखानी होगी।

कहीं 'अच्छी बच्ची' होने का दबाव तो नहीं

जिस दिन से पुणे के केतन अग्रवाल को उसकी मंगेतर द्वारा धक्का देकर 400 फीट नीचे खाई में गिराकर मार डालने का खौफनाक वाकया सामने आया है, उस दिन से देश में सिया गोयल के साथ एक बार फिर से सोनम रघुवंशी भी चर्चा में आ गई है। क्योंकि ये दोनों मामले करीब-करीब एक जैसे हैं। दोनों ही हत्याकांडों में लड़‌कियां मुख्य आरोपी हैं।

राजा रघुवंशी को मेघालय में एक गहरी खाई में गिराने का अभी तक का आरोप सोनम रघुवंशी और उनके प्रेमी राज कुशवाह पर ही है, ठीक वैसे ही जैसे केतन अग्रवाल को लोहगढ़ किले में 400 फीट नीचे खाई में गिराकर हत्या करने का आरोप उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी पर है।

लेख-लोकमित्र गौतम के द्वारा

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