Parliament Disruption Political Satire: पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, संसद के दोनों सदनों में विपक्ष बहुत शोरशराबा और हंगामा करता है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर तीखे शब्दबाण छोड़े जाते हैं। ऐसी हालत में शांति कैसे लाई जाए?'
हमने कहा, 'यदि पीसफुल वातावरण चाहिए तो अगले चुनाव में उम्मीदवारों का चयन करते समय शांतिलाल और शांतिबाई जैसे नामवालों को टिकट देनी चाहिए, गूंगे-बहरों को भी प्रत्याशी बनाया जा सकता है। महात्मा गांधी ने 3 बंदरों के माध्यम से संदेश दिया था- बुरा मत बोलो, बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो! विपक्ष को इससे सीख लेनी चाहिए। उसके नेता सरकार की बुराई देखने, सुनने से बचें और उसके खिलाफ बुरा भी न बोलें। सरकार को पूरी तरह मनमानी करने दें। उसकी अनदेखी करें, इससे सदन में स्मशान जैसी शांति बनी रहेगी।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, शायद इसी वजह से बीजेपी नेता विपक्ष मुक्त भारत की बात करते हैं। न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी! चीन, उत्तर कोरिया और रूस में विपक्ष नहीं है इसलिए कोई भी फैसला निर्विवाद और निर्विरोध लिया जाता है और तत्काल लागू कर दिया जाता है। वहां कोई चिल्ल-पों नहीं होती। अपने यहां विपक्ष सरकार पर पूंजीपतियों से सांठगांठ का आरोप लगाता है, पेपर लीक, चंदा चोरी, महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाकर हल्ला-गुल्ला करता है। सत्तारुढ़ नेता को भगवान मानकर सम्मान नहीं करता। इस विपक्ष में संघ की शाखा का अनुशासन और संस्कार नहीं हैं। विपक्ष के कुछ नेता अपने भड़काऊ भाषणों से सत्तापक्ष के कान में पिघला हुआ सीसा डाल देते हैं। आखिर यह कब तक चलेगा?'
हमने कहा, 'इस समस्या से निपटने के प्रयास हो रहे हैं? चुनाव आयोग, एसआईआर की भरपूर कोशिशों से ऐसे लाखों मतदाताओं का सफाया हो रहा है, जो बीजेपी या एनडीए को वोट नहीं देते। सीजेआई ने भी कुछ युवा वकीलों व बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' कह दिया था। उनकी इस कमेंट का असर यह हुआ कि कॉकरोच जनता पार्टी बन गई। इधर बीजेपी है तो उधर सीजेपी जिसने जंतरमंतर पर बड़ा युवा आंदोलन कर डाला। ऐसे में शांति कैसे स्थापित होगी?'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, शोर हो तो भी क्या, सरकार का काम नहीं रुकता। विपक्ष के बहिर्गमन के बाद वह कोई भी बिल निर्विरोध पारित करा लेती है। इतना जरूर है कि दो-तिहाई बहुमत नहीं होने से परिसीमन बिल पास कराना सरकार के लिए टेढ़ी खीर है।'
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा