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नवभारत विशेष: अब जमीनी जंग में उतरेंगे मशीनी योद्धा, बदलेगा युद्धों का चेहरा

Humanoid Robot Soldiers: यूक्रेन युद्ध में अमेरिका निर्मित 'फैंटम MK-1' ह्यूमनॉइड रोबोट के परीक्षण ने सैन्य दुनिया में हलचल मचा दी है। क्या भविष्य के युद्ध केवल एल्गोरिदम और एआई कमांडर ही लड़ेंगे?

  • Written By: आकाश मसने
Updated On: Mar 28, 2026 | 11:09 AM

ह्यूमनॉइड रोबोटिक सोल्जर (डिजाइन फोटो)

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AI Military Technology: अब युद्ध में मानवीकृत या ह्यूमनॉइड रोबोट सैनिकों की आहट सुनाई देने लगी है। क्या वाकई युद्ध क्षेत्र में सैनिकों के खून नहीं बल्कि मशीन का ‘बाइनरी कोड’ बहेगा? बुद्ध जमीन पर कम और स्क्रीन पर ज्यादा लड़े जाएंगे। ‘सॉफ्टवेयर’ केवल संचार का माध्यम नहीं घातक हथियार बनेगा और ‘एल्गोरिद्य’ अब कमांडर की भूमिका निभाएंगे।

इस महीने यूक्रेन में पहले ह्यूमनॉइड रोबोट सैनिक के परीक्षण से निकले नतीजों ने ऐसे सवालों को जन्म दिया है। टाइम पत्रिका ने अमेरिका निर्मित ‘फैंटम एमके-1’ जैसे युद्धक सिस्टम का विवरण दिया है, जिसका पिछले महीने यूक्रेन युद्ध में परीक्षण किया गया। यह एक मिलिट्री ह्युमनाइड रोबोट है। इन रोबोटिक इकाइयों को गोदामों, डॉकयार्ड्स और फैट्रियों में सामान ढोने या लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन करने और टोह लेने के लिए इस्तेमाल करने की बात कही जा रही है।

क्या है फैंटम एमके-1 ?

सैन्य रणनीतिकारों के लिए ‘फैंटम’ एक ऐसा हथियारबंद सैनिक है, जिसे दूर से नियंत्रित किया जा सकता है। यह कभी सोता नहीं, इसे भूख नहीं लगती और डर से मुक्त हो, हर तरह के हथियार चलाकर घातक हमले में सिद्धहस्त है। ‘दोहरे उपयोग वाली तकनीक’ का यह सबसे खतरनाक उदाहरण है। जो रोबोट आज कारखाने में बक्से उठा रहा है, उसे कल ‘मशीनगन’ थमाकर मोर्चे पर तैनात किया जायेगा। इन मशीनी मानवों का हर सेंसर, 360 डिग्री तक देख सकने वाला कैमरा जो डेटा इकट्ठा करेगा, उसे एक विशाल ‘क्लाउड नेटवर्क’ में भेजेगा, जहां एआई इस डेटा का विश्लेषण कर दुश्मन की अगली चाल का अनुमान लगा लेगा। ये ऐसी तकनीक से युक्त हैं, जिनकी मदद से एक सेकंड के हजारवें हिस्से में दुश्मन को पहचानकर हमला कर सकेंगे। ऐसे ह्यूमनॉइड रोबोट को ऐसे इलाकों में भेजने की योजना है, जहां मानवीय जोखिम बहुत अधिक है- जैसे शहरी युद्ध या रासायनिक, जैविक हमले वाले क्षेत्र।

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क्या होगा असर?

क्या ये मशीनें किसी दुश्मन सैनिक, आतंकवादी और डरे हुए नागरिक के बीच अंतर कर पायेंगी? एआई की पहचान करने की क्षमता अभी भी त्रुटिपूर्ण हो सकती है। इससे ‘कोलेटरल डैमेज’ का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है; क्योंकि मशीन केवल डेटा देखती है, संदर्भ नहीं। मशीनी सैनिकों का मार्च का दुष्परिणाम केवल शारीरिक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक भी है। रोबोट सैनिकों की ऐसी सेना का सामना करना कठिन है, जिसे आप डरा नहीं सकते। यह दुश्मन के मनोबल को पूरी तरह तोड़ देगा। ये जब जंगी मैदान में उतरेंगे तो केवल गोलियां नहीं बरसायेंगे, गहरा खौफ पैदा करेंगे। दूर से नियंत्रित किए जाने वाले ये रोबोट सैनिक युद्ध को जिम्मेदारी और मानवीयता से काट देंगे। यह ‘वीडियो-गेमिंग’ संस्कृति युद्ध को इतना आसान बना देगी कि भविष्य में युद्ध की आशंकाएं बढ़ जाएंगी।

यह भी पढ़ें:- 28 मार्च का इतिहास: जब साइना नेहवाल बनीं दुनिया की ‘क्वीन’ और कपिल देव का ऐतिहासिक रिकॉर्ड हुआ था ध्वस्त

आज इजराइल व अमेरिका का ईरान से युद्ध जारी है। रूस-यूक्रेन युद्ध अनवरत है तो अफगानिस्तान-पाकिस्तान भी सींग भिड़ाए हुए हैं। सूडान और म्यांमार गृहयुद्ध झेल रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी नाकाबंदी उस क्षेत्र को युद्धक्षेत्र बना सकती है। चीनी युद्धपोतों की भारी तैनाती और अमेरिकी नौसेना के जवाबी कदम से ताइवान में तनाव युद्ध में बदल सकता है। अटकल है कि ट्रंप ईरान के बाद क्यूबा को निशाना बनाएंगे। युद्ध के मैदान में एक सैनिक केवल अपने हथियार का उपयोग नहीं करता बल्कि वह अपने विवेक, प्रशिक्षण और मानवीय संवेदनाओं का भी प्रयोग करता है। वह एक निहत्थे नागरिक, एक घायल दुश्मन या एक आत्मसमर्पण करते सिपाही के बीच अंतर करना जानता है। लेकिन जब यह ऐसे स्वायत्त प्रणालियों’ के हाथ में आता है, तो यह सब ‘डेटा पॉइंट’ में बदल जाता है। एआई के पास संदर्भ की समझ नहीं होती।

बदलेगा युद्धों का परिदृश्य

यदि एक मशीन को आदेश दिया गया है कि वह ‘हथियारबंद खतरे’ को समाप्त करे, तो क्या वह उस बच्चे को पहचान पाएगी जो खिलौना बंदूक लेकर खेल रहा है या उस किसान को, जिसके हाथ में हथियार नहीं खेती का औजार है? यह स्थिति हमें एक ऐसी भयावह वास्तविकता की ओर ले जाएगी। युद्ध अपराधों के लिए हमेशा किसी कमांडर को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन यदि एक स्वायत्त रोबोट किसी अस्पताल पर हमला कर दे, तो कठघरे में कौन खड़ा होगा ? क्या वह प्रोग्रामर होगा जिसने कोड लिखा ? क्या वह निर्माता कंपनी होगी जिसने हार्डवेयर बनाया?

लेख- संजय श्रीवास्तव के द्वारा

Future of war humanoid robot soldiers phantom mk1 ukraine test

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Published On: Mar 28, 2026 | 11:09 AM

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