

विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालकर अधिक रिटर्न वाले बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।
MSCI उभरते बाजार सूचकांक में भारत का वेटेज 18-19% से घटकर करीब 11% हुआ।
दक्षिण कोरिया और ताइवान की सेमीकंडक्टर व AI कंपनियां निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।
वैश्विक निवेशक अब देश के बजाय तेजी से बढ़ती कंपनियों और बेहतर मुनाफे को प्राथमिकता दे रहे हैं।
FII Outflow from Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों का शेयर बिक्री कर पैसा वापस निकालना केवल बाजार की अस्थिरता की बात नहीं है। विदेशी निवेशक यह देखते हैं कि उनके निवेश को कौन-सा देश अधिक रिटर्न और तेजी से मुनाफा देता है। भारत की तुलना में ताइवान, दक्षिण कोरिया व अमेरिका की कुछ कंपनियां अधिक आकर्षक धनवृद्धि का अवसर प्रदान करती हैं। इसलिए विदेशी निवेशक उनकी ओर जा रहे हैं। एमएससीआई उदयोन्मुख बाजार निर्देशांक में भारत का वेटेज पहले 18 से 19 प्रतिशत था, जो अब घटकर लगभग 11 प्रतिशत पर आ गया है।
इसके विपरीत दक्षिण कोरिया व ताइवान का कुल वेटेज लगभग 50 प्रतिशत हो गया है। खास तौर पर टीएसएमसी, सैमसंग व एसके हायनिक्स जैसी 3 कंपनियों के निर्देशांक का कुल योगदान लगभग 30 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण सेमीकंडक्टर व एआई क्षेत्र में अधिक मुनाफा होना है। वैश्विक निवेशक अब किसी देश की बजाय अधिक तेजी से तरक्की कर रही कंपनियों को प्रधानता देते हैं। विदेशी इक्विटी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 2026 में अब तक लगभग 3 लाख करोड़ डॉलर निकाल लिए हैं।
अंकटाड के अनुसार 2025 में वैश्विक प्रत्यक्ष निवेश 14 प्रतिशत बढ़कर 1.6 खरब डॉलर हो गया था। विकसित अर्थव्यवस्था वाले देश में निवेश 43 प्रतिशत बढ़कर 728 अरब डॉलर हो गया था। इसके विपरीत विकासशील देशों में निवेश 2 प्रतिशत घटकर 877 अरब डॉलर पर आ गया था।
भारत में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत तथा शॉर्ट टर्म गेन पर 20 प्रतिशत सरचार्ज लगता है। यदि अनिवासी भारतीयों को कैपिटल गेन में छूट दी जाए तो तत्काल स्थिति सुधर सकती है। होल्डिंग टैक्स रेट व इंडेक्सिंग टैक्स में कटौती से भी विदेशी निवेशकों को बढ़ावा मिलेगा। अमेरिका के शेयर बाजार में तेजी गिनी-चुनी एआई कंपनियों पर निर्भर है। एआई क्षेत्र की बड़ी कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए कर्ज ले रही हैं।
ब्याज दर बढ़ी तो वित्तपूर्ति महंगी हो जाएगी और कुछ प्रोजेक्ट में विलंब होगा। फिर भी यह नहीं कहा जा सकता कि एआई क्षेत्र की तेजी समाप्त होगी। पिछले 2 वर्षों में शेयर बाजार में अपेक्षित रिटर्न नहीं मिलने से अनेक निवेशक निराश हो गए हैं। अनेक अच्छी कंपनियों के शेयर नीचे आ गए हैं। केवल दीर्घकालीन निवेशकों के लिए यह अच्छा अवसर है। अभी निवेश करने पर उन्हें अधिक शेयर मिल सकते हैं।
अगली तिमाही में कंपनियों का मुनाफा मध्यम से उच्च दोहरे अंक में टिका तो स्वदेशी और विदशी निवेशकों का विश्वास फिर बढ़ सकता है। विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने का अर्थ यह नहीं है कि भारत की दीर्घकालीन क्षमता खत्म हो गई। विदेशी निवेशक केवल आश्वासन पर नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष वृद्धि, मुनाफे की क्षमता तथा भविष्य में मिलने वाले रिटर्न पर ध्यान देते हैं। यदि भारतीय कंपनियों का मुनाफा बढ़ा, मूल्यांकन आकर्षक रहा तथा रुपये की अस्थिरता दूर हुई तो विदेशी निवेशक फिर भारत के शेयर मार्केट में पैसा लगा सकते हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा