

Highlights:
सेंसेक्स शुरुआती बढ़त गंवाकर 560 अंक यानी 0.74 प्रतिशत तक फिसला।
निफ्टी के लिए 22,950–23,000 का सपोर्ट और 23,250–23,300 का रेजिस्टेंस अहम माना गया।
ब्रेंट क्रूड में नरमी के बावजूद कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही, जिससे बाजार की चिंता बनी रही।
Aaj Ka Share Market: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हफ्ते की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ खुले, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर कायम नहीं रह सकी। बिकवाली के दबाव में बीएसई सेंसेक्स एक समय 560 अंक तक फिसल गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जबकि एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेतों ने भी बाजार की दिशा को प्रभावित किया। इस बीच पीएसयू बैंक शेयरों में मजबूती रही, लेकिन आईटी और निजी बैंकिंग शेयर दबाव में नजर आए।
सोमवार को बीएसई सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 74,729.27 के बंद स्तर से 120.03 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की बढ़त लेकर 74,849.30 पर खुला। हालांकि, कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली हावी हुई और सेंसेक्स 560 अंक यानी 0.74 प्रतिशत गिरकर 74,169.23 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।
दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी 50 ने 23,150.85 के स्तर पर कारोबार शुरू किया। इसका पिछला बंद स्तर 23,146.15 था। शुरुआती बढ़त के बावजूद बाजार में दबाव बना रहा और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
बाजार की गिरावट का असर व्यापक सूचकांकों पर भी दिखाई दिया। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.54 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा और इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। निफ्टी ऑयल एंड गैस में भी करीब 0.6 प्रतिशत की बढ़त रही।
भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें शामिल हैं। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि, सोमवार को इसमें कुछ नरमी आई।
कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 2 प्रतिशत गिरकर 107.76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 1 प्रतिशत फिसलकर 100.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले सप्ताह निफ्टी में करीब 2.8 प्रतिशत की तेजी और आईटी कंपनियों के उम्मीद से बेहतर नतीजों ने बाजार को सहारा दिया था। बैंकिंग क्षेत्र के मजबूत वित्तीय नतीजे भी निवेशकों की धारणा को मजबूती दे सकते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। बड़े शेयरों के आकर्षक मूल्यांकन और रुपये में मजबूती से विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख कुछ सकारात्मक हुआ है, लेकिन तेल की ऊंची कीमतें इस रुझान को प्रभावित कर सकती हैं।
उनके अनुसार, निकट अवधि में लार्ज-कैप शेयर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इस सप्ताह कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे भी शेयरों की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,950 से 23,000 का दायरा तत्काल सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, 23,250 से 23,300 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 52.81 पर रहा, जो इसके औसत 34.70 से ऊपर है। वहीं, पुट-कॉल रेशियो (PCR) 1.08 दर्ज किया गया।
जबकि पिछले कारोबारी सत्र में लगातार 15 सत्रों तक बिकवाली करने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक शुद्ध खरीदार बने थे। उन्होंने करीब ₹1,166 करोड़ के शेयर खरीदे।
वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने लगातार 45 सत्रों से जारी खरीदारी का सिलसिला तोड़ते हुए लगभग ₹3,661 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की थी। विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के इस अलग-अलग रुख पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।
सोमवार को एशियाई बाजारों में भी एक जैसी दिशा देखने को नहीं मिली। जापान का निक्केई सूचकांक करीब 0.84 प्रतिशत गिरावट में कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.83 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ हरे निशान में रहे।
इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट सूचकांक 5 प्रतिशत से अधिक टूट गया। वैश्विक बाजारों की इस अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू कंपनियों के नतीजों के बीच भारतीय बाजार में निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं।