रिकार्डतोड़ वोटों से धनखड़ चुने गए नए उपराष्ट्रपति
- Written By: नवभारत डेस्क
उम्मीद के अनुरूप एनडीए के प्रत्याशी व बंगाल के पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ देश के नए उपराष्ट्रपति चुन लिए गए. 1997 के बाद से हुए पिछले 6 उपराष्ट्रपति चुनावों में उन्होंने सबसे अधिक अंतर से जीत हासिल की. पिछले उपराष्ट्रपति चुनाव में वेंकैया नायडू को लगभग 68 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि धनखड़ ने 74.36 प्रतिशत वोट हासिल किए. धनखड़ के निर्वाचन से संसद के दोनों सदनों के स्पीकर राजस्थान से हो गए हैं. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला भी राजस्थान के हैं. चुनाव नतीजे आने से पहले ही झुंझनू में धनखड़ के गांव में जश्न शुरू हो गया था.
विपक्ष की फूट की वजह से मार्गरेट अल्वा 200 का आंकड़ा भी नहीं छू पाईं. संयुक्त विपक्ष की प्रत्याशी अल्वा को सिर्फ 182 वोट मिले. पिछली बार एनडीए प्रत्याशी वेंकैया नायडू को 516 तथा विपक्षी उम्मीदवार गोपालकृष्ण गांधी को 244 वोट मिले थे. खास बात यह है कि इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में 55 सांसदों ने वोट नहीं दिया. इनमें 34 टीएमसी के, बीजेपी, सपा और शिवसेना के 2-2 तथा बसपा का 1 सांसद शामिल है. बीजेपी की ओर से सनी देओल और संजय धोत्रे ने राष्ट्रपति चुनाव में भी मतदान नहीं किया था. ये दोनों सांसद तभी से बीमार पड़े हुए हैं. मनमोहन सिंह ने व्हीलचेयर पर आकर तथा कोरोना संक्रमित अभिषेक मनु सिंघवी ने पीपीई सूट पहनकर मतदान किया.
टीएमसी के दोनों सांसदों शिशिर कुमार अधिकारी और उनके पुत्र दिव्येंदु अधिकारी ने पार्टी के मनाही निर्देश के बावजूद मतदान किया. इसके कुछ घंटे बाद लोकसभा में टीएमसी के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया है. इन दोनों पर पहले ही अयोग्यता की कार्यवाही चल रही है. नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति धनखड़ ने जनता दल से राजनीति की शुरूआत की थी. 1989 में वे झुंझनु से लोकसभा सदस्य चुने गए थे.
सम्बंधित ख़बरें
‘पुत्र मोह’ के बवाल के बीच कुशवाहा का बड़ा एक्शन! RLM की सभी इकाइयां भंग, 5 लोगों के हाथ में कमान
मंच पर आए, पत्र दिखाया और चल दिए… नीतीश, नड्डा, चिराग NDA की पीसी से बिना बोले क्यों निकले?
उपराष्ट्रपति चुनाव में किसने की NDA की मदद, केजरीवाल पर क्यों उठ रहा सवाल? BJP ने जताया खास आभार
उपराष्ट्रपति चुनाव में गड़बड़ाया गणित, विपक्षी एकता एक बार फिर तार-तार; मतदान में हो गई क्रॉस वोटिंग
अप्रैल से नवंबर 1990 तक वे केंद्रीय उपमंत्री रहे. बाद में वे कांग्रेस में आ गए और किशनगढ़ सीट से 1993 से 1998 तक कांग्रेस विधायक रहे. इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट में वकालत करते रहे. 2019 में मोदी सरकार ने उन्हें बंगाल का राज्यपाल बनाया था. वहां उनका ममता बनर्जी सरकार से विवाद चला करता था.
