

नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, क्या यह विचित्र नहीं लगता कि अजीत पवार के विमान दुर्घटना में निधन के बाद राज्य में 3 दिनों का शोक जारी रहते अजीत की पत्नी सुनेत्रा पवार ने मुंबई जाकर उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली? क्या उन पर आकस्मिक रूप से टूट पड़े दुख के पहाड़ ने उन्हें विचलित नहीं किया?'
हमने कहा, 'सुनेत्रा पवार ने दिखा दिया कि भावना से बड़ा कर्तव्य होता है। कर्तव्य के लिए मन कठोर करना पड़ता है और शोक पर काबू पाना पड़ता है। जिंदगी व समय की रफ्तार किसी के जाने से नहीं रुक जाती। पीछे देखने की बजाय आगे देखना पड़ता है। बिजनेसमैन भी शोक को त्यागकर चौथे दिन गद्दी संभाल लेते हैं। भगवान कृष्ण ने गीता में अर्जुन से कहा कि विगत के लिए शोक मत कर, ऐसा करना बुद्धिमानों का लक्षण नहीं है। कोई किसके लिए कब तक रोएगा! काम-धाम संभालना ही पड़ता है।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा अन्य राज्यों में लोग दशमात्र के बाद शुद्ध होते हैं और तेरहवीं करने के बाद अपना काम संभालते हैं। कुछ लोग मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण का पाठ भी कराते हैं जिससे निधन के बाद आत्मा की मुक्ति हो जाए,
हमने कहा, 'आज की तेज रफ्तार शहरी जिंदगी में परिस्थितियां बदली है। लोग व्यावहारिक हो गए हैं। कर्मकांड सीमित हो गया है। हितैषी भी समझाते हैं कि जाने वाला तो चला गया, वह लौटकर नहीं आएगा। अपना कामकाज संभालो। कर्तव्य से पीछे मत हटो। शोक सागर में डूबो मत। वहां से झटपट तैरकर बहर निकल आओ।'
हमने कहा, 'राजनीति ऐसी है कि जो मौका चूका, वह गया काम से। सुनेत्रा ने दिल पर पत्थर रखकर अपने पति की राजनीतिक विरासत को संभाल लिया और डिप्टी सीएम की शपथ ले ली। उनके चित्त में दुख हो सकता है कि महत्वपूर्ण वित्त विभाग नहीं मिला। उन्हें आबकारी, खेल, युवा कल्याण, अल्पसंख्यक विकास तथा औकाफ जैसे विभाग दिए गए। फिलहाल वित्त विभाग अपने पास रखकर राज्य का बजट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पेश करेंगे।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज दुख तो शरद पवार को भी अपने भतीजे के जाने का है लेकिन उससे ज्यादा दुख यह है उन्हें सुनेत्रा के डिप्टी सीएम पद लेने के बारे में अंधेरे में रखा गया, उनकी राय तक नहीं ली गई। हमने कहा, 'इससे समझ लीजिए कि राजनीति बड़ी निर्मम होती है जो पारिवारिक रिश्तों व संवेदनाओं को पीछे छोड़ देती है।'
लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा