निशानेबाज: विदेश में बस जाए भारत का छोरा, तो कहलाता है डायस्पोरा

Government Holiday in America: अमेरिका में नौकरी, व्यवसाय तथा अन्य क्षेत्रों में कार्यरत इन भारतीयों ने अपने देश के प्रति लगाव बनाए रखा है। उनमें से कितने ही भारत स्थित अपने अभिभावकों को धन भेजते है।
विदेश में बस जाए भारत का छोरा, तो कहलाता है डायस्पोरा
विदेश में बस जाए भारत का छोरा, तो कहलाता है डायस्पोरा (सौ. सोशल मीडिया)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, मराठी में लड़के को पोरा व लड़की को पोरी कहा जाता है लेकिन डायस्पोरा शब्द का क्या अर्थ है? यह शब्द कबसे प्रचलित हुआ?’ हमने कहा, ‘अमेरिका में रहनेवाले भारतीयों को डायस्पोरा कहा जाता है। 2007 में विजय मिश्रा ने किताब लिखी जिसका शीर्षक था- दि लिटरेचर ऑफ इंडियन डायस्पोरा! इसके बाद से यह शब्द ज्यादा प्रचलित हो गया। अमेरिका में नौकरी, व्यवसाय तथा अन्य क्षेत्रों में कार्यरत इन भारतीयों ने अपने देश के प्रति लगाव बनाए रखा है। उनमें से कितने ही भारत स्थित अपने अभिभावकों को धन भेजते हैं या साल-दो साल में कुछ दिनों के लिए भारत आते हैं। उन्होंने वहां आपसी संपर्क बना रखा है।

भारत के किसी भी राज्य के निवासी वहां समरस हो जाते हैं। अपने मूल देश की भाषा, संस्कृति, तीज-त्योहार उन्हें परस्पर जोड़ते हैं। वहां भारतीय व पाकिस्तानी भी अच्छे दोस्त हैं क्योंकि वे एशियाई होने की भावना रखते है और राजनीतिक बहस टालते हैं। अमेरिका में जितने मोटल हैं, उनमें से अधिकांश किसी न किसी गुजराती पटेल के हैं। ‘पाटीदार’ स्टोर में वह सारी वस्तुएं मिल जाएंगी जो भारत में मिलती हैं। न्यूजर्सी राज्य तो मिनी इंडिया जैसा बन गया है। आईटी में ज्यादातर भारतीय ही हैं। वहां डेंटिस्ट या सर्जन भी भारतीय ही मिलेगा।’

पड़ोसी ने कहा, ‘अमेरिका में रहते हुए भी वह लोग अपने सारे त्योहार उत्साहपूर्वक सामूहिक रूप से मनाते हैं। दिवाली पर अमेरिका में सरकारी छुट्टी दी जाने लगी है। अपने त्योहारों के अलावा वहां रहनेवाले भारतीय क्रिसमस ट्री लगाने, हैलोवीन परेड, जैक ओ लैंटर्न आदि में भी रुचि रखते हैं। जहां भारतीय समुदाय है, वहां भव्य मंदिर भी बन गए हैं। राबिन्सन विले का स्वामीनारायण मंदिर सगमर्मर निर्मित स्थापत्य की शानदार मिसाल है।’

हमने कहा, ‘अमेरिका में बैंगन को एगप्लांट कहते हैं, भिंडी को ओकरा व तुरई के जुकिनी कहा जाता है। वहां जन्म लेनेवाले भारतीय बच्चे 2 संस्कृतियों का तालमेल बिठाने में भ्रमित हो जाते हैं। उनकी बोलचाल में अमेरिकन एक्सेंट आ जाता है। घर में हिंदी, मराठी या तेलुगू बोली जाती है और बाहर अंग्रेजी चलती है। उनको मजाक में एबीसीडी कहा जाता है। इसका अर्थ है- अमेरिका बॉर्न कन्फ्यूज्ड देसी! वैसे एबीसीडी का मतलब यह भी है- एनीबडी केन डान्स!’

लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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