कांग्रेस पर बढ़ रहा है वामपंथी विचारधारा का प्रभाव, जानिए राहुल गांधी का वैचारिक बदलाव की पूरी कहानी

Congress Left Wing: क्या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस धीरे-धीरे वामपंथी विचारधारा के प्रभाव में आ रही है? सावरकर पर दिए बयान से लेकर परिवार पर हमलों तक, समझें पार्टी के बदलते रुख की कहानी।
Rahul Gandhi Congress Ideological Shift
राहुल गांधीसोर्स- सोशल मीडिया
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Highlights

  • संसद हमले के समय वामदलों का रुख और नीति।

  • राहुल गांधी के सलाहकारों में वामपंथ का प्रभाव।

  • सावरकर और आरएसएस पर राहुल गांधी के तीखे हमले।

  • वंदे मातरम गायन को लेकर कांग्रेस का रुख।

  • जॉर्ज सोरोस और ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से जुड़ा विवाद।

Rahul Gandhi Congress Ideological Shift: 13 दिसंबर 2001 को नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद पर पाकिस्तान पोषित आतंकवादियों ने हमला किया था। इसे आजाद भारत के इतिहास की सबसे बड़ी आतंकी घटनाओं में गिना जाता है। उस समय की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने आतंकवादियों के ठिकानों को नष्ट करने और पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के सभी विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया था।

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत देश के लगभग सभी राजनीतिक दलों ने सरकार के हर फैसले का खुलकर समर्थन किया। हालांकि, वामपंथी दलों (लेफ्ट) ने सैन्य कार्रवाई से बचने और कूटनीतिक दबाव के जरिए इस मामले को सुलझाने की सलाह दी थी।

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का वैचारिक बदलाव

वामपंथी विचारधारा हमेशा से हिंदुत्व को प्रगति की राह में रुकावट मानती रही है। जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ सालों से राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पर भी इस विचारधारा का असर साफ दिखाई देने लगा है। चुनावी राजनीति में वामपंथी दल लगातार पिछड़ रहे हैं। आज भारत के किसी भी राज्य में उनकी सरकार नहीं है और लोकसभा में भी उनकी सीटें घटकर दहाई के आंकड़े से नीचे आ चुकी हैं।

हालांकि, मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों में उनका वैचारिक प्रभाव आज भी मौजूद है। उनका एक मजबूत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी है। चुनावी रास्ते से सत्ता पाना मुश्किल देखकर वामपंथी विचारकों ने रणनीति के तहत कांग्रेस और राहुल गांधी के करीब आना शुरू कर दिया। वे राहुल गांधी के सलाहकारों के तौर पर भी जुड़े, जिसका असर उनके बयानों में दिखने लगा।

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राहुल गांधीसोर्स- सोशल मीडिया

सावरकर और आरएसएस पर लगातार हमले

महाराष्ट्र में अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कभी सावरकर की तारीफ की थी। महाराष्ट्र में एक बड़ा वर्ग सावरकर को अपना आदर्श मानता है, लेकिन राहुल गांधी अक्सर कहते हैं कि उनकी लड़ाई सत्ता की नहीं, बल्कि विचारधारा की है। यही वजह है कि वे बार-बार आरएसएस को निशाने पर लेते हैं ठीक उसी तरह जैसे वामपंथी नेता लिया करते थे।

हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान वामपंथी छात्र नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद राहुल गांधी ने बीजेपी से ज्यादा संघ परिवार पर हमले बोले और आरोप लगाया कि देश के विश्वविद्यालयों व संस्थानों पर संघ का कब्जा होता जा रहा है। इसके अलावा, संसद द्वारा अध्यादेश पास होने के बाद पूरे वंदे मातरम गीत के गायन पर भी कांग्रेस के अंदर असमंजस दिखा। शुरुआत में वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पूरे वंदे मातरम को अपनाने की बात कही, लेकिन कुछ दिनों बाद पार्टी ने ऐतिहासिक कारणों का हवाला देकर इसे खारिज कर दिया।

कैप्टन स्मित मच्छार के अदम्य साहस पर कांग्रेस की खामोशी

बीते 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रहे विमान के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके ओमान मूल के सह-पायलट ने जानलेवा हमला कर दिया। स्मित ने अपनी जान जोखिम में डालकर सभी यात्रियों की सुरक्षा की। उन्होंने बाद में बताया कि हमले के दौरान वे हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे, जिससे उन्हें साहस मिला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कैप्टन स्मित के साहस की जमकर तारीफ की। हालांकि, कांग्रेस की ओर से केवल अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बेहद सीमित शब्दों में उनकी सराहना की, जबकि राहुल गांधी ने इस पर कोई बयान नहीं दिया। आलोचकों का मानना है कि किसी हिंदू धार्मिक आस्था से जुड़े व्यक्ति की तारीफ करने में पार्टी हिचकिचा रही है।

Captain Smit Machchhar
कैप्टन स्मित मच्छारसोर्स- सोशल मीडिया
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इतिहास और जॉर्ज सोरोस से जुड़े आरोप

विशेषज्ञों के मुताबिक, जब कम्युनिस्ट कमजोर होते हैं, तो वे अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत संगठनों का सहारा लेते हैं। 1930 के दशक में भी कम्युनिस्टों ने कांग्रेस में शामिल होकर उसे प्रभावित करने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता न मिलने पर उन्होंने कांग्रेस की आलोचना शुरू कर दी थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को अपनी मूल विचारधारा पर ही चलना चाहिए, वरना मुख्यधारा से उसका भटकाव देश और पार्टी दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

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दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी आरोप लगाती रही है कि अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस के संगठन भारत में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सोरोस की संस्था 'ओपन सोसाइटी फाउंडेशन' के पूर्व उपाध्यक्ष सलिल शेट्टी अक्टूबर 2022 में कर्नाटक के दौरान राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में नजर आए थे, जिसको लेकर बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने भी सवाल उठाए थे।

(ये लेखक मुनीष त्रिपाठी के निजी विचार हैं। मुनीष त्रिपाठी राजनीतिक मामलों के वरिष्ठ पत्रकार, इतिहासकार और साहित्यकार हैं।)

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