

Why Adhik Maas Occurs: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, इस समय अधिक मास चल रहा है इसलिए पंचांग के मुताबिक यह 12 नहीं, बल्कि 13 महीने का साल है। ऐसा क्यों हो रहा है?' हमने कहा, 'हमारे हिंदू पंचांग की रचना चंद्रमा के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के अनुसार है। इसमें तिथि घटती-बढ़ती रहती है। चंद्रमा पर आधारित वर्ष 360 दिनों का होता है जबकि अंग्रेजी कैलेंडर 365 दिनों का होता है। हर चौथे वर्ष फरवरी माह 29 दिनों का होता है। तब 366 दिनों का एक वर्ष होता है जिसे लीप ईयर कहते हैं। 2028 में लीप का होता है। तब 366 दिनों का एक ईयर आएगा। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा 365.25 दिनों में करती है। इस तरह का तालमेल बिठाने के लिए हर ढाई वर्ष बाद हिंदू पंचांग में अधिक मास आता है। यह एक तरह का करेक्शन है।'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, अधिक मास में शादी-ब्याह, गृहप्रवेश जैसे कार्य नहीं किए जाते लेकिन इसमें भजन, नामस्मरण, भागवत कथा, गीता- रामायण पाठ जैसे आयोजन भरपूर होते हैं।'
हमने कहा, 'इसे परुषोत्तम मास भी कहा गया है। यह माह प्रेरणा देता है कि हम खुद में भी करेक्शन करें। क्रोध व द्वेष न करें। शिकायतें कम करें। चुगली व निंदा करने की आदत छोड़ें, संयम से रहें।' दान-धर्म व गरीबों की मदद करें। सत्कर्म करते रहें। प्रेम करें लेकिन मोहग्रस्त न हों। दान दें पर उसका गर्व न करें। दाहिने हाथ ने क्या दिया, इसका पता बाएं हाथ को भी नहीं चलना चाहिए। लालच पर अंकुश रखें। उदारता, विनम्रता, धैर्य और प्रार्थना को अपनाएं, शुभ विचारों को मन में स्थान दें। आत्म कल्याण, समाज कल्याण और राष्ट्र कल्याण की ओर प्रवृत्त हों। नेतृत्व करें लेकिन झूठी अकड़ न दिखाएं। अनावश्यक जल्दबाजी न करते हुए धीरज रखें। कहा गया है- धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय!'
पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, किसी चीज की अति भी नहीं करनी चाहिए, कहते हैं अतिकामा दशग्रीव, अतिलोभात दुर्योधन, अति दानात हतः कर्ण, अति सर्वत्र वर्जयेत! याद रखें कि पुरुषोत्तम मास जीवन को नकारने के लिए नहीं बल्कि सुधारने के लिए है। गीता का 15 वां अध्याय 'पुरुषोत्तम योग' कहलाता है। राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं तो कृष्ण लीला पुरुषोत्तम !'