

2026 Medicine Nobel Optogenetics: दिमाग हमारे शरीर का वह हिस्सा है, जिसे हम हर क्षण इस्तेमाल करते हैं। जानते हुए भी और न जानते हुए भी। लेकिन आजतक हम पूरी तरह से इस दिमाग को ही नहीं समझ पाए हैं। जिस दिमाग ने दुनिया के अनंत रहस्यों को खोला है, आखिर उसके अपने रहस्य अभी पूरी तरह से क्यों नहीं खोले जा सके हैं?
मसलन हम सोचते कैसे हैं, किसी चेहरे को देखते ही हमें उससे जुड़ी वर्षों पुरानी स्मृतियां क्यों तत्क्षण ताजा हो जाती हैं? कोई आवाज या गंध, आखिर कैसे हमारे अतीत के रहस्यों को पलक झपकते ताजा कर देती हैं? साथ ही यह सहज सवाल कि आखिर कोई विचार हमारे मस्तिष्क को कैसे सक्रिय कर देता है? इन सवालों को खोजने की यात्रा में विज्ञान ने अब एक महत्वपूर्ण दरवाजा खोला है।
2026 का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार पीटर हेगेमैन, जॉर्ज नागेल और कार्ल डिसेरॉथ को प्रकाश-संवेदी आयन चैनलों और ऑप्टोजेनेटिक्स से संबंधित उनके काम के लिए दिया गया है। इन वैज्ञानिकों की खोजों ने प्रकाश की मदद से विशिष्ट तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधि को नियंत्रित करने का एक रास्ता दिखाया है।
स्टैनफोर्ड के डिसेरॉथ, बर्लिन के हेगेमैन, वुर्जबर्ग के नागेल की खोज ऑप्टोजेनेटिक्स ने न्यूरोसाइंस की दिशा ही बदल दी है।
इस तकनीक में प्रकाश-चालित ऐसे स्विच मिलते हैं, जिनसे दिमाग की नर्वसेंस और सर्किट को नियंत्रित कर ब्रेन फंक्शन, व्यवहार और बीमारियों को समझा जा सकता है। इसकी शुरुआत हेगेमैन हरे शैवाल के रोशनी की और तैरने के रहस्य को सुलझाने के साथ हुई।
हेगेमैन और नागेल ने एक ऐसा प्रोटीन खोजा जो नीली रोशनी पड़ने पर आयन चैनल खोलकर इलेट्रिकल हलचल पैदा करता है। जबकि डिसेरॉथ ने इसी जीन का उपयोग करके जीवित चूहों के दिमाग में नर्वसेंस के लिए एक लाइट कंट्रोल स्विच तैयार किया।
हमारा मस्तिष्क अरबों न्यूरॉन का एक ऐसा जटिल संसार है, जिसमें हर क्षण असंख्य विद्युत और रासायनिक संकेत दौड़ रहे होते हैं। हम किसी चीज को जब देखते हैं, तो उसका एक निश्चित अर्थ निकालते हैं और उसी अर्थ के मुताबिक अपनी प्रतिक्रिया करते हैं।
यह वही क्षण होता है, जब हमारे भीतर भावनाओं और स्मृतियों की भी अपनी अनेक गतिविधियां चल रही होती हैं। अभी तक समस्या यह रही है कि इतने जटिल नेटवर्क में किसी एक न्यूरॉन या न्यूरॉन्स के समूह की वास्तविक भूमिका को अलग करके समझना बेहद कठिन था।
2026 के चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार इसी रोशनी की एक महत्वपूर्ण किरण है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे हम मस्तिष्क के हर रहस्य को पढ़ सकेंगे। हो सकता है ऐसा कभी संभव ही न हो। क्योंकि मस्तिष्क केवल कोशिकाओं और विद्युत संकेतों का संग्रहभर नहीं है।
इससे हमारी चेतना, हमारी स्मृतियां, हमारी भावनाएं और हमारी मनुष्यता जुड़ी हुई है। लेकिन विज्ञान का काम सारे उत्तर एक साथ हासिल करना नहीं है, उसका काम अंधेरे में अगला कदम देखना है और मस्तिष्क के अंधेरे में वह अगला कदम अब प्रकाश ने दिखाया है।
लेख-लोकमित्र गौतम के द्वारा