संपादकीय: उड़ता ताबूत हैं मिग विमान, 4 वर्षों में 150 पायलटों की मौत
पाकिस्तान के आधुनिक अमेरिका निर्मित विमान को हमारी वायुसेना के जांबाज पायलट अभिनंदन वर्धमान ने डॉग फाइट में अपने मिग से मार गिराया था और विमान गिरने पर उन्हें पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया था।
- Written By: दीपिका पाल
उड़ता ताबूत हैं मिग विमान (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: मिग-21 को ‘उड़ता ताबूत’ यूं ही नहीं कहते. रूस में निर्मित यह काफी पुराना विमान किसी म्यूजियम में रखने या किसी पार्क की सजावट बढ़ाने के योग्य रह गया है, उड़ाने लायक तो कतई नहीं. ऐसे कबाड़ हो चुके विमानों की जान का जोखिम लेकर जो पायलट हिम्मत से उड़ा रहे हैं उनके हुनर पर देश को नाज होना चाहिए. पायलट कितना ही सजग, अनुभवी व एकाग्र चित्त हो, यदि मशीन फेल या बेकाबू हो जाए तो क्या कर सकता है? यह हौसले और हुनर की बात है कि पाकिस्तान के आधुनिक अमेरिका निर्मित विमान को हमारी वायुसेना के जांबाज पायलट अभिनंदन वर्धमान ने डॉग फाइट में अपने मिग से मार गिराया था और विमान गिरने पर उन्हें पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया था।
इसके बावजूद इससे मिग विमान की श्रेष्ठता या उपयोगिता रेखांकित नहीं होती. इसमें दो राय नहीं कि यह आउटडेटेड और रिस्की विमान है. फ्लाइट लेफ्टिनेंट अभिजीत गाडगिल की राजस्थान के सूरतगढ़ में मिग-21 विमान की दुर्घटना में 17 सितंबर 2021 को मृत्यु हुई थी. तब से 4 वर्षों में भारतीय वायुसेना के 340 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं तथा 150 से अधिक होनहार युवा पायलटों ने जान गंवाई है. हाल ही में 2 अप्रैल को फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव जगुआर विमान की दुर्घटना में जान गवां बैठे। यह 2 सीटोंवाला विमान गुजरात के जामनगर से उड़ा था जिसमें तकनीकी खराबी आ गई. ऐसी हालत में एयरबेस तथा स्थानीय आबादी को नुकसान न पहुंचे, यह सोचकर विमान को गिरने से पहले दूर ले जाना पायलटों ने उचित समझा।
यह उनकी कर्तव्य भावना थी. एक पायलट गंभीर रूप से घायल हो गया जबकि सिद्धार्थ यादव शहीद हो गए. पुराने विमानों को मरम्मत कर उधारी के पुर्जो के साथ जैसे-तैसे उड़ने लायक बनाया जाता है लेकिन आसमान में वह कब दगा दे जाएंगे, इसका कोई भरोसा नहीं रहता. दुनिया के किसी भी प्रमुख देश के पास इतने पुराने विमानों के भरोसे वायुसेना नहीं चलती. विमानों की कमी से रक्षा जरूरतों के मुताबिक पर्याप्त स्क्वाड्रन भी नहीं बन पा रही हैं. ट्रेनर विमान से सीखकर एकदम से सुपरसॉनिक विमान उड़ाना हंसी-खेल नहीं है इसके लिए बीच में एक सब-सुपरसॉनिक विमान होना चाहिए ताकि पायलट अभ्यस्त हो सके. इस तरह के तेजस विमान को बनाने में वर्षों लग गए।
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अभी भी उसके इंजन को लेकर पूरी तरह समाधान नहीं हो पाया है. यह बात अपनी जगह है कि फ्रांस से राफेल विमान खरीदे गए किंतु एयरफोर्स की जरूरतों को देखते हुए उनकी तादाद अपर्याप्त है. चीन और पाकिस्तान का खतरा देखते हुए एयरफोर्स के लिए नए विमान खरीदने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. मिग विमानों से होनेवाली ट्रेजेडी का मुद्दा 19 वर्ष पहले आमिर खान की फिल्म ‘रंग दे बसंती’ में उठाया गया था लेकिन सवाल है कि तबसे अब तक क्या हुआ? पायलटों की जान की क्या सचमुच सरकार को परवाह है? दशकों पुराने विमानों को रिटायर कर नए आधुनिक विमान वायुसेना को उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
