Uttarayan Significance
Uttarayan Significance: सूर्य देव को समर्पित मकर संक्रांति ऐसा पर्व है, जो हर साल जनवरी के महीने में आता है और अपने साथ नई शुरुआत, नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच लेकर आता है। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग नामों से त्योहार मनाया जाता है, कहीं खिचड़ी बनती है तो कहीं तिल के लड्डू, कहीं पतंग उड़ती है तो कहीं स्नान-दान का खास महत्व होता है।
लेकिन इन सभी परंपराओं के बीच जो बात हर जगह समान रहती है, वह है सूर्य देव की पूजा और उन्हें जल अर्पित करना। लोक मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा केवल आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे पौराणिक कथा, धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक कारण भी छिपे हैं।
पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। यही कारण है कि इस दिन को देवताओं का शुभ काल माना गया है।
मान्यता है कि सूर्य देव इसी दिन अपने पुत्र शनि देव से मिलने जाते हैं। शनि न्याय और कर्म के देवता हैं, इसलिए यह पर्व अहंकार त्यागने, रिश्तों में सामंजस्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
सूर्य को जल अर्पित करना उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक है, क्योंकि सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं।
सुबह-सुबह सूर्य को अर्घ्य देने से मन शांत होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
सूर्य की किरणों से विटामिन-D मिलता है, जो हड्डियों और इम्यून सिस्टम के लिए जरूरी है।
जल जब सूर्य की किरणों से होकर धरती पर गिरता है, तो यह नकारात्मक विचारों के त्याग का संकेत माना जाता है।
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ज्योतिष के अनुसार सूर्य मजबूत हो तो व्यक्ति को समाज में सम्मान, नेतृत्व क्षमता और सफलता मिलती है।
मकर संक्रांति पर सूर्य को जल चढ़ाना हमें सिखाता है कि जैसे सूर्य प्रतिदिन बिना रुके प्रकाश देता है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए—पुरानी नकारात्मकताओं को छोड़कर नई ऊर्जा और नई सोच के साथ।
इसीलिए मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक और वैज्ञानिक अभ्यास है।