

Narak Chaturdashi 2024: दीवाली का त्योहार आने में जहां पर कुछ दिन ही शेष है वहीं पर पर खुशियों का त्योहार सबसे बड़े त्योहार के रूप में होता है। केवल एक दिन नहीं यह त्योहार हिंदू धर्म में 5 दिनों का होता हैं इन दिनों का अलग-अलग महत्व और पूजा के नियम होते है। दीवाली के त्योहार में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज मनाया जाता है। दीवाली यानि लक्ष्मी पूजा से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी या छोटी दीवाली का दिन मनाया जाता है।
इस दिन को रूप चौदस के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि, नरक चतुर्दशी के दिन यम का दीपक जलाना चाहिए यानि कि, मृत्यु के देवता के नाम एक दीपक। इस दिन दीपक जलाने के पीछे ज्योतिषचार्य राकेश चतुर्वेदी ने अर्थ और नियम बनाए है।
यहां पर छोटी दीवाली या नरक चतुर्दशी की बात की जाए तो, दीवाली के एक दिन पहले 30 अक्टूबर को दोपहर 01 बजकर 16 मिनट से शुरू हो जाएगी जो अगले दिन 31 अक्टूबर को दोपहर में 03 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन नरक चतुर्दशी के दिन वैसे तो आंगन में दीयें जलाए जाते हैं लेकिन एक दीपक यम के नाम पर ही जलाना चाहिए।
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मान्यता के अनुसार, दीवाली की रात एक दिन पहले नरक चतुर्दशी के दिन यम का दीपक जलाया जाता है। कहते हैं कि, यम का दीपक जलाने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है. साथ ही, प्रार्थना की जाती है कि यमदेव नरक के द्वार बंद कर दें और हमें सेहममंद रखें. ऐसा करने वाले जातकों पर यम की कृपा होती है। यहां पर यम का दीपक जलाने के लिए आप एक चौमुखी दीपक या कोई सामान्य दीपक लें सकते हैं. इसमें 4 बत्तियां इस प्रकार लगाएं जो चारों दिशाओं को इंगित करती हों। इसके बाद दीए में आप सरसों का तेल भरकर रख दें इसे कामना के साथ पूरे घर में घुमाने के बाद दक्षिण दिशा की ओर रख दीजिए इस दिशा में कहीं भी रख सकते है।
यहां पर नरक चतुर्दशी का दिन मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा का महत्व जुड़ा हुआ है। इसे लेकर कहा जाता है कि, भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का संहार किया था. इसलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है, इसलिए इस दिन लोग राक्षस पर भगवान कृष्ण की जीत का जश्न मनाते हैं। घरों की साफ-सफाई करते हैं और इसे फूलों या लाइटों से सजाते हैं, इस दिन बुराई के अंधेरे को दूर करने और सकारात्मकता का स्वागत करने के लिए दीपक जलाए जाते हैं। नरक चतुर्दशी को रूप चौदस के नाम से जानते हैं इसके लिए भोर में उबटन लगाकर स्नान कर इस दिन को मनाया जाता है।