गृहप्रवेश में दुल्हन ही क्यों मारती है चावल के कलश को ठोकर, जानें इसकी वजह

Kalash Ritual: हिंदू धर्म में गृह प्रवेश के दौरान पैर से चावल के कलश को गिराने की परंपरा नई नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल से चली आ रही हैं। जो आज भी पूरी श्रद्धा एवं ख़ुशी से निभाई जाती है।
गृहप्रवेश की विधि में दुल्हन ठोकर क्यों मारती हैं चावल के कलश को, जानिए इसकी वजह
नई दुल्हन क्यों गिराती हैं पैर से चावल का कलश (सौ.सोशल मीडिया)
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Hindu Rituals : हिंदू धर्म में विवाह को बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ संस्कार माना गया है। इस दौरान शादी से पहले व शादी के बाद कुछ रीति-रिवाज व रस्में निभाई जाती हैं जो कि बहुत ही खास होती है। जिसमें एक रस्म में दुल्हन गृह प्रवेश करते समय पैर से चावल से भरा कलश गिराती हैं।

आपको बता दें, यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, लेकिन इसके पीछे का कारण इसका एक परंपरा ही नहीं, मनोवैज्ञानिक तर्क भी छिपा है। आइए जानते हैं नई दुल्हन क्यों गिराती हैं पैर से चावल का कलश जानिए क्या है धार्मिक मान्यता।

नई दुल्हन क्यों गिराती हैं पैर से चावल का कलश

पैर से कलश गिराने की क्यों है परंपरा

हिंदू धर्म में गृह प्रवेश के दौरान पैर से चावल के कलश को गिराने की परंपरा नई नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल से चली आ रही हैं। जो आज भी पूरी श्रद्धा एवं ख़ुशी से निभाई जाती है। हिन्दू धर्म में अन्न को पैर लगाना अशुभ माना जाता है, लेकिन गृह प्रवेश के दौरान नई बहुत से यह रस्म पूरे विधि-विधान से करवाई जाती है। इस दौरान घर के मुख्य द्वार पर एक कलश में चावल भरकर रखे जाते हैं और फिर नई बहुत अपने सीधे पैर से चावल से भरे कलश में ठोकर मारती है।

क्या है कलश और चावल का महत्व

आपको बता दें, कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक और अक्षत यानि चावल को धन की प्रतीक माना गया है। जब दुल्हल गृह प्रवेश के दौरान अपने पैर से चावल से भरे कलश को गिराती है तो इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है।

मां लक्ष्मी का आगमन

हिंदू धर्म में बहु को गृह लक्ष्मी कहा गया है और दुल्हन जब घर में प्रवेश करती है तो उसे देवी लक्ष्मी के रूप में ही देखा जाता हैं। जो कि कलश को पैर से गिराकर घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और अन्न-धन लेकर आती है।

क्या कहता है मनोविज्ञान

हिंदू धर्म में निभाई जाने वाली इस परंपरा के पीछे मनोवैज्ञानिक पहलू भी छिपा हुआ है। दुल्हन को घर में प्रवेश कराते समय जब कलश गिराने की परंपरा निभाई जाती है तो इसका मतलब दुल्हन को सहज महसूस कराना है। साथ ही इसके जरिए यह भी बताया जाता है कि अब वो इस घर की सदस्य व सम्मान की अधिकारी है।

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